शिअद-भाजपा गठबंधन होने पर बदल जाएंगे जालंधर की 9 सीटों पर समीकरण
गठबंधन के बाद आप और कांग्रेस में आए कई दिग्गज भाजपा और शिअद में जा सकते हंै वापस
जालंधर (विकास मौदगिल): पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह द्वारा प्रदेश में अकाली-भाजपा गठबंधन को जरूरी बताने पर सियासत गरमा गई है। अब सवाल ये उठता है कि गठबंधन होगा या नहीं। अगर गठबंधन होता है तो पंजाब में सियासी उठापटक होना तय है। अगर जालंधर लोकसभा हलके की 9 विधानसभा सीटों की बात करें तो अकाली-भाजपा गठबंधन के बाद सभी 9 सीटों पर समीकरण बदलना तय है। इन सीटों में जालंधर सेंट्रल, नार्थ, वेस्ट, कैंट, नकोदर, आदमपुर, शाहकोट, फिल्लौर व करतारपुर शामिल हैं। सियासी विश्लेषकों की मानें तो अगर अकाली-भाजपा गठबंधन होता है तो जालंधर में कई सीटों पर जीत के आस के साथ पुराने भाजपाई और पुराने अकाली नेता वापसी का रुख कर सकते हैं। इनमें दिग्गज भी शामिल हैं जोकि भाजपा व शिअद में सम्मान और जीत न मिल पाने कारण आम आदमी पार्टी का हिस्सा बने थे। गठबंधन के बाद आप के झाडू के तिनके बिखरना तय है।
शिअद को गठबंधन की जरूरत
पंजाब की सियासत में साल 1969 के बाद से शिरोमणि अकाली दल का सूबे में असर बढ़ा। इस दल ने पंथक राजनीति के बूते खासकर ग्रामीण इलाकों में अपनी अच्छी खासी पैठ बढ़ाई। पंजाब में वे इलाके जहां पंथक मुद्दे सबसे ज्यादा असरदार रहते हैं, वहां शिअद की अच्छी पकड़ बनी। इसी के बूते शिअद ने पंजाब में सात बार सरकार बनाई है मगर अब शिअद सियासी संकट से जूझ रहा है। साल 2022 के चुनाव में शिअद केवल 3 सीटों पर सिमट कर रह गया। अब शिअद दोफाड़ का शिकार हुआ और इसके समक्ष एक नया दल शिरोमणि अकाली दल (पुनर सुरजीत) खड़ा हो गया।
कांग्रेस और आप में बेचैनी
भाजपा-शिअद के गठबंधन की अटकलों से सूबे में आप और कांग्रेस में बेचैनी का माहौल दिख रहा है। दो दिन पहले आम आदमी पार्टी के वित्तमंत्री हरपाल चीमा ने प्रेसवार्ता कर भाजपा-शिअद राज के कार्यकाल पर कई गंभीर सवाल खड़े किए थे। उनका कहना था कि शिअद फिर भाजपा के सहारे में सत्ता में आने का सपना देख रहा है मगर पंजाब के लोग साल 2007 से 2017 तक इनका कार्यकाल देख चुके हैं और अब इनके चुंगल में आने वाले नहीं है।