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11 मिनट तक क्लिनिकली डेड रहीं 68 वर्षीय महिला का दावा: ‘स्वर्ग और नर्क दोनों देखे, आज भी महसूस होती है उस दुनिया की खुशबू’

11 मिनट तक क्लिनिकली डेड रहीं 68 वर्षीय महिला का दावा: ‘स्वर्ग और नर्क दोनों देखे, आज भी महसूस होती है उस दुनिया की खुशबू’

ब्रिटेन की 68 वर्षीय शेर्लोट होल्म्स (Charlotte Holmes) ने अपने जीवन का ऐसा अनुभव साझा किया है, जिसने मौत के बाद की दुनिया को लेकर एक बार फिर बहस और जिज्ञासा को जन्म दे दिया है। शेर्लोट का दावा है कि वह 11 मिनट तक क्लिनिकली डेड रहीं और इस दौरान उन्होंने स्वर्ग और नर्क—दोनों को देखा। होश में लौटने के बाद भी वह उस अनुभव को बेहद स्पष्ट रूप से याद करती हैं।

अचानक हार्ट अटैक और मौत का ऐलान

शेर्लोट होल्म्स रूटीन मेडिकल चेकअप के लिए अस्पताल गई थीं। इसी दौरान अचानक उनका ब्लड प्रेशर खतरनाक स्तर तक पहुंच गया और उन्हें तुरंत भर्ती किया गया। इलाज के दौरान उनकी हालत तेजी से बिगड़ गई और एक समय ऐसा आया जब डॉक्टरों ने उन्हें क्लिनिकली डेड घोषित कर दिया। उस वक्त उनके पति भी अस्पताल में मौजूद थे।

करीब 11 मिनट बाद डॉक्टरों की कोशिशों से शेर्लोट की धड़कनें दोबारा शुरू हुईं और वह होश में लौटीं।

‘शरीर से बाहर निकलने जैसा अहसास’

शेर्लोट का कहना है कि जब उन्होंने आंखें बंद कीं, तो उन्हें ऐसा लगा जैसे वह अपने शरीर से बाहर निकल गई हों। उन्होंने अस्पताल के कमरे में डॉक्टरों को खुद पर इलाज करते हुए देखा। इसके बाद उन्हें एक ऐसी दुनिया में ले जाया गया, जहां उन्हें स्वर्ग जैसी अनुभूति हुई।

उनके अनुसार वहां फूलों की बेहद खास खुशबू थी, मधुर संगीत सुनाई दे रहा था और चारों ओर शांति ही शांति थी। उन्होंने अपने उन परिवार के सदस्यों को भी देखा, जो पहले इस दुनिया से जा चुके थे। शेर्लोट ने दावा किया कि उन्होंने अपने मृत बच्चे को भी देखा, जो उन्हें देखकर मुस्कुरा रहा था।

डर नहीं, सिर्फ सुकून

शेर्लोट बताती हैं कि उस अनुभव के दौरान उन्हें न तो दर्द महसूस हुआ और न ही किसी तरह का डर। उन्होंने कहा, “वह जगह इतनी शांत और सुंदर थी कि मैं वहां से लौटना नहीं चाहती थी।” उनके मुताबिक, लौटने के बाद भी उन्हें कई दिनों तक फूलों जैसी खुशबू महसूस होती रही।

वैज्ञानिक नजरिया और आस्था का सवाल

हालांकि चिकित्सा विज्ञान ऐसे अनुभवों को मस्तिष्क की प्रतिक्रिया, ऑक्सीजन की कमी या न्यूरोलॉजिकल गतिविधियों से जोड़कर देखता है, लेकिन शेर्लोट इसे आत्मा की यात्रा मानती हैं। उनका कहना है कि इस अनुभव ने मौत को लेकर उनका डर पूरी तरह खत्म कर दिया है।

शेर्लोट होल्म्स का यह दावा एक बार फिर इस सवाल को सामने लाता है—क्या मौत के बाद सच में कोई और दुनिया है, या यह सिर्फ मस्तिष्क की आखिरी प्रतिक्रिया? जवाब जो भी हो, लेकिन उनका अनुभव लाखों लोगों के लिए हैरानी और सोच का विषय जरूर बन गया है।