लखनऊ: नए साल पर मेजर की बेटी को मिला इंसाफ, फर्जी कब्जाधारियों से छुड़ाया गया घर
लखनऊ के इंदिरा नगर इलाके में नए साल की शुरुआत एक भावुक और न्यायपूर्ण कहानी के साथ हुई। स्वर्गीय मेजर बिपिन चंद्र भट्ट की बेटी अंजना के लिए 31 दिसंबर 2025 से 1 जनवरी 2026 की रात जिंदगी का सबसे बड़ा सुकून लेकर आई, जब वर्षों बाद उन्हें उनका पैतृक घर वापस मिला, जिस पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए कब्जा कर लिया गया था।

दुख और संघर्ष से भरा अंजना का जीवन
मेजर बिपिन चंद्र भट्ट भारतीय सेना में सेवाएं दे चुके थे। वर्ष 1994 में उनके निधन के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। अंजना के परिवार में दो बहनें और एक भाई थे, लेकिन समय के साथ उनके भाई और एक बहन का भी निधन हो गया। इन सदमों ने अंजना को मानसिक रूप से तोड़ दिया और वह सीजोफ्रेनिया जैसी गंभीर बीमारी से ग्रस्त हो गईं। वर्ष 2016 से अंजना एक रिहैबिलिटेशन सेंटर में उपचाराधीन हैं।
कमजोरी का फायदा उठाकर किया गया फर्जी कब्जा
चंदौली जिले के रहने वाले बलवंत यादव उर्फ बबलू और मनोज यादव ने अंजना की मानसिक स्थिति का फायदा उठाते हुए फर्जी वसीयत और जाली दस्तावेज तैयार कर उनके घर पर अवैध कब्जा कर लिया। जब अंजना को इसकी जानकारी मिली, तो उन्होंने स्थानीय थाने में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन लंबे समय तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद बदली किस्मत
न्याय की आस में अंजना ने 31 दिसंबर 2025 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर अपनी पीड़ा साझा की। मुख्यमंत्री ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल पुलिस को कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद लखनऊ की गाजीपुर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए महज 24 घंटे के भीतर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
1 जनवरी 2026 को अंजना को मिला उनका घर
पुलिस ने अवैध कब्जा हटाकर 1 जनवरी 2026 को अंजना को उनका घर सौंप दिया। पुलिस की मौजूदगी में जैसे ही अंजना ने अपने घर में कदम रखा, वह भावुक हो गईं।
घर लौटते ही छलका दर्द और खुशी
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अंजना ने घर के हर कमरे को देखा और दीवारों को छूकर पुरानी यादों में खो गईं।
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बाहर आकर उन्होंने नारियल फोड़ा, दीपक जलाया और फूल अर्पित किए।
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पड़ोस की महिलाओं से गले लगकर फूट-फूट कर रो पड़ीं।
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खुशी के आंसुओं के बीच वह बार-बार कहती रहीं, “थैंक्यू योगी अंकल! गॉड ब्लेस यू!”
लापरवाही पर कार्रवाई
मामले में लापरवाही बरतने के आरोप में एक चौकी इंचार्ज को निलंबित कर दिया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भूमाफिया पर जीरो टॉलरेंस नीति के चलते अंजना को त्वरित न्याय मिल सका।
यह मामला न केवल प्रशासनिक सख्ती का उदाहरण है, बल्कि यह भी दिखाता है कि सही मंच तक आवाज पहुंचे तो न्याय जरूर मिलता है।