सूरत बनेगा देश का पहला स्लम-मुक्त शहर, शहरी विकास में रचेगा नया इतिहास
मुंबई, दिल्ली या देश के अन्य बड़े महानगरों की पहचान जहां ऊंची इमारतों के साथ झुग्गी-बस्तियों से जुड़ी रही है, वहीं गुजरात का सूरत शहर अब इस पारंपरिक तस्वीर को बदलने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाने जा रहा है। देश की ‘डायमंड सिटी’ कहलाने वाला सूरत जल्द ही भारत का पहला स्लम-मुक्त शहर बनने की दहलीज पर खड़ा है।
प्रधानमंत्री आवास योजना से मिली रफ्तार
स्वच्छता, औद्योगिक विकास और बेहतर प्रशासन के लिए पहचाने जाने वाले सूरत ने अब आवास के क्षेत्र में भी बड़ी उपलब्धि हासिल की है। सूरत नगर निगम ने प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) और राज्य सरकार की हाउसिंग पॉलिसी को प्रभावी ढंग से लागू किया। इसके तहत शहर की अधिकांश झुग्गी-बस्तियों को चरणबद्ध तरीके से हटाकर वहां पक्के और सुरक्षित आवासों का निर्माण किया गया। प्रशासन का स्पष्ट लक्ष्य है कि सूरत में कोई भी परिवार कच्चे या असुरक्षित घर में रहने को मजबूर न रहे।
प्रवासी मजदूरों की बड़ी आबादी बनी चुनौती
एक बड़े औद्योगिक और कारोबारी केंद्र के रूप में सूरत में देशभर से आए प्रवासी मजदूरों की संख्या काफी अधिक है। इतनी बड़ी आबादी को स्थायी और सुरक्षित आवास उपलब्ध कराना नगर निगम के लिए बड़ी चुनौती थी। बावजूद इसके, बीते कुछ वर्षों में लाखों लोगों को पक्के मकानों में पुनर्वासित किया जा चुका है, जिसे शहरी प्रशासन की बड़ी सफलता माना जा रहा है।
देशभर के शहरों के लिए बनेगा मिसाल
अहमदाबाद मिरर की रिपोर्ट के अनुसार, सूरत की यह पहल केवल गुजरात तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि देश के अन्य महानगरों के लिए भी रोल मॉडल बन सकती है। यदि सूरत पूरी तरह स्लम-मुक्त शहर बनने में सफल होता है, तो यह भारत के शहरी विकास मॉडल को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाएगा।
समावेशी शहरी विकास की ओर कदम
सूरत का यह प्रयास दर्शाता है कि सही नीतियां, मजबूत प्रशासनिक इच्छाशक्ति और निरंतर निगरानी के जरिए झुग्गी-मुक्त शहर का सपना साकार किया जा सकता है। आने वाले समय में सूरत न केवल ‘डायमंड सिटी’ के रूप में, बल्कि आधुनिक, सुरक्षित और समावेशी शहरी विकास के प्रतीक के तौर पर भी जाना जा सकता है।