बाल भिक्षावृत्ति पर सरकारी दावों की खुली पोल, डीसी ऑफिस परिसर में ही दिखे भीख मांगते बच्चे

बाल भिक्षावृत्ति पर सरकारी दावों की खुली पोल, डीसी ऑफिस परिसर में ही दिखे भीख मांगते बच्चे

Child begging

शहर में बाल भिक्षावृत्ति रोकू टास्क फोर्स द्वारा की गई छापेमारी को लेकर प्रशासन ने बड़ी उपलब्धि का दावा किया था। जिला प्रोग्राम अधिकारी मनजिंदर सिंह द्वारा जारी प्रेस नोट में कहा गया कि शहर में कहीं भी कोई बच्चा भीख मांगता नहीं पाया गया।
लेकिन इस दावे की हकीकत महज 24 घंटे के भीतर ही सामने आ गई, जब डिप्टी कमिश्नर कार्यालय परिसर में बड़ी संख्या में बच्चे खुलेआम भीख मांगते नजर आए।

यह दृश्य न केवल सरकारी दावों की सच्चाई उजागर करता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि फाइलों में दर्ज “सफलता” और जमीनी हकीकत के बीच गहरी खाई मौजूद है।

प्रशासनिक हृदय स्थल बना बाल भिक्षावृत्ति का अड्डा

डिप्टी कमिश्नर कार्यालय किसी भी जिले का प्रशासनिक केंद्र होता है। यहीं से कानून व्यवस्था, सामाजिक सुरक्षा, बाल संरक्षण और जनकल्याण से जुड़े अहम फैसले लिए जाते हैं।
लेकिन हैरानी की बात यह है कि यही परिसर अब बाल भिक्षावृत्ति का सुरक्षित ठिकाना बनता नजर आ रहा है।

रोजाना डीसी ऑफिस परिसर के बाहर और भीतर फटे कपड़ों में छोटे-छोटे बच्चे, हाथ फैलाए हुए, कार्यालयों में आने-जाने वाले आम लोगों और कर्मचारियों से भीख मांगते दिखाई देते हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह सब अधिकारियों की नजरों से छिपा हुआ है?
या फिर सब कुछ दिखते हुए भी जानबूझकर ‘न दिखने’ का नाटक किया जा रहा है?

उच्च अधिकारियों की मौजूदगी, फिर भी बेखौफ बाल भिक्षावृत्ति

डीसी कार्यालय परिसर में केवल डिप्टी कमिश्नर ही नहीं, बल्कि
एडीशनल डिप्टी कमिश्नर, एसडीएम, सहायक कमिश्नर, मुख्यमंत्री फील्ड ऑफिसर, तहसीलदार, नायब तहसीलदार समेत अनेक वरिष्ठ अधिकारियों के कार्यालय स्थित हैं।

इसके अलावा परिसर में पुलिस कमिश्नर व कमिश्नरेट अधिकारियों, सुरक्षा में तैनात पुलिस कर्मी, अधिकारियों के निजी सुरक्षा कर्मचारी और अन्य स्टाफ हर समय मौजूद रहता है।
इसके बावजूद बच्चों से दिनभर बेखौफ भीख मंगवाई जा रही है।

यह स्थिति साफ तौर पर प्रशासनिक लापरवाही, निगरानी तंत्र की विफलता और जिम्मेदारी से मुंह मोड़ने की ओर इशारा करती है।

सवालों के घेरे में टास्क फोर्स की कार्यप्रणाली

बाल भिक्षावृत्ति रोकने के लिए गठित टास्क फोर्स के दावों पर अब गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
अगर डीसी ऑफिस जैसे हाई-सिक्योरिटी और हाई-विजिबिलिटी क्षेत्र में भी बच्चे भीख मांग रहे हैं, तो फिर शहर के बाकी इलाकों की स्थिति क्या होगी—इसका अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं।

अब देखना यह है कि प्रशासन इस रिपोर्ट को एक और फाइल तक सीमित रखता है या फिर वास्तविक कार्रवाई कर बाल भिक्षावृत्ति के इस खुले सच को स्वीकार करते हुए ठोस कदम उठाता है।