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भारतवंशी खगोलशास्त्री प्रो. श्रीनिवास कुलकर्णी को रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी का स्वर्ण पदक

भारतवंशी खगोलशास्त्री प्रो. श्रीनिवास कुलकर्णी को रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी का स्वर्ण पदक

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लंदन | इंटरनेशनल डेस्क

भारतवंशी खगोलशास्त्री प्रोफेसर श्रीनिवास कुलकर्णी को खगोल विज्ञान के क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान के लिए लंदन स्थित रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी (RAS) द्वारा प्रतिष्ठित स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया है। यह पुरस्कार खगोल विज्ञान के क्षेत्र में सर्वोच्च सम्मानों में से एक माना जाता है।

महाराष्ट्र में जन्मे प्रो. कुलकर्णी वर्तमान में कैलिफ़ोर्निया इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी (Caltech) में खगोलशास्त्र और ग्रह विज्ञान के प्रोफेसर हैं। उन्होंने अपने शोध कार्यों के दौरान ब्राउन ड्वार्फ, दूरस्थ गामा-रे बर्स्ट्स और कई अन्य खगोलीय पिंडों की खोज कर खगोल भौतिकी को नई दिशा दी है।

1824 से दिया जा रहा है यह सर्वोच्च सम्मान

आरएएस द्वारा वर्ष 1824 से प्रतिवर्ष प्रदान किया जाने वाला यह स्वर्ण पदक अब तक अल्बर्ट आइंस्टीन, स्टीफन हॉकिंग, जोसेलिन बेल बर्नेल और एडविन हबल जैसे महान वैज्ञानिकों को मिल चुका है। इस सम्मान के साथ प्रो. कुलकर्णी भी विश्व की चुनिंदा वैज्ञानिक प्रतिभाओं की सूची में शामिल हो गए हैं।

आरएएस द्वारा जारी प्रशस्ति पत्र में प्रो. कुलकर्णी के “खगोल भौतिकी में निरंतर, नवोन्मेषी और अभूतपूर्व योगदान” को विशेष रूप से रेखांकित किया गया है।

सम्मान पर क्या बोले प्रो. कुलकर्णी

स्वर्ण पदक मिलने पर प्रो. कुलकर्णी ने कहा,

“यह जानकर मुझे बेहद आश्चर्य हुआ, खासकर जब पिछले विजेताओं की शानदार सूची को देखा।”

उन्होंने अपने दीर्घकालिक सहयोगियों के साथ-साथ पालोमर ट्रांजिएंट फैक्टरी और ज़्विकी ट्रांजिएंट फ़ैसिलिटी की इंजीनियरिंग टीम का भी आभार जताया, जिनके सहयोग से कई ऐतिहासिक खोजें संभव हो सकीं।

वैश्विक पहचान बना चुके हैं कुलकर्णी

प्रो. कुलकर्णी वर्ष 1985 में कैलटेक से जुड़े थे और तब से अब तक उन्होंने खगोल विज्ञान में कई महत्वपूर्ण खोजें की हैं। हाल ही में उन्हें खगोल विज्ञान के क्षेत्र में 2024 का शॉ पुरस्कार भी मिल चुका है, जो उनकी वैश्विक वैज्ञानिक प्रतिष्ठा को और मजबूत करता है।