संडे बाजार ने बिगाड़ा ट्रैफिक सिस्टम, भगवान वाल्मीकि चौक से श्री राम चौक तक लगा लंबा जाम

संडे बाजार ने बिगाड़ा ट्रैफिक सिस्टम, भगवान वाल्मीकि चौक से श्री राम चौक तक लगा लंबा जाम

शहर | लोकल रिपोर्ट

भगवान वाल्मीकि चौक के आसपास लगने वाले संडे बाजार में रविवार को अव्यवस्था का नजारा देखने को मिला। सड़क पर ही फड़ियां और रेहड़ियां लगाए जाने से ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। सड़क की चौड़ाई कम होने के कारण वाहनों को सिंगल लाइन में चलना पड़ा, जिससे कुछ ही देर में लंबा जाम लग गया।

ऑटो और ई-रिक्शा बने जाम की बड़ी वजह

जाम की स्थिति को और बदतर बनाने में ऑटो और ई-रिक्शा चालकों ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी। कई ऑटो और ई-रिक्शा जाम के बीच रॉन्ग साइड से चलते नजर आए, जिससे ट्रैफिक पूरी तरह ठप हो गया। हालात ऐसे बन गए कि भगवान वाल्मीकि चौक से लेकर श्री राम चौक तक वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।

पुलिस की कार्रवाई बेअसर

अक्सर ट्रैफिक पुलिस अवैध कब्जों को लेकर संडे बाजार पर कार्रवाई करती रही है, लेकिन इस बार ट्रैफिक को सुचारू ढंग से चलाने में पुलिस भी नाकाम नजर आई। संडे बाजार की ओर जाने वाले ऑटो और ई-रिक्शा चालकों को बेरोक-टोक एंट्री दी जा रही है, जिससे हर रविवार ट्रैफिक की स्थिति और ज्यादा बिगड़ जाती है।

दोपहिया वाहन भी बने बाधा

फड़ियों और रेहड़ियों से खरीदारी करने आए लोगों ने अपने दोपहिया वाहन सड़क पर ही खड़े कर दिए। इससे सड़क और संकरी हो गई और देखते ही देखते वाहनों की कतारें लग गईं।

25–30 मिनट में तय हुआ कुछ सौ मीटर का रास्ता

जाम का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि भगवान वाल्मीकि चौक से श्री राम चौक तक पहुंचने में लोगों को 25 से 30 मिनट का समय लग गया।

आपात सेवाओं के लिए खतरा

हैरानी की बात यह है कि इसी सड़क से सिविल अस्पताल की एंबुलेंस और दमकल विभाग की गाड़ियां भी गुजरती हैं, बावजूद इसके यहां ट्रैफिक कंट्रोल के लिए कोई स्थायी और प्रभावी व्यवस्था नहीं की गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि किसी आपात स्थिति में एंबुलेंस फंस जाए तो बड़ा हादसा हो सकता है।

स्थायी समाधान की मांग

स्थानीय निवासियों और राहगीरों ने प्रशासन से मांग की है कि

  • संडे बाजार के लिए अलग स्थान तय किया जाए

  • ऑटो व ई-रिक्शा की एंट्री को नियंत्रित किया जाए

  • अवैध फड़ियों पर सख्ती से कार्रवाई हो

  • ट्रैफिक पुलिस की स्थायी तैनाती की जाए

लोगों का कहना है कि हर रविवार यही हाल रहता है, लेकिन समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा।