Indonesia Premarital Sex Law: शादी से पहले संबंध पर सख्त कानून, विदेशियों पर भी लागू 
नई दिल्ली। आधुनिक दौर में जहां ‘वन नाइट स्टैंड’ और ‘हुकअप कल्चर’ को कई देशों में सामाजिक स्वीकार्यता मिल रही है, वहीं इंडोनेशिया ने इसके बिल्कुल विपरीत रुख अपनाया है। दुनिया के सबसे अधिक मुस्लिम आबादी वाले इस देश ने शादी से पहले या शादी के बाहर शारीरिक संबंधों को अपराध की श्रेणी में रखते हुए सख्त कानून लागू किया है।
2022 में पारित हुआ नया आपराधिक कानून
इंडोनेशिया की संसद ने वर्ष 2022 में नया क्रिमिनल कोड (Criminal Code) पारित किया था, जिसका उद्देश्य देश की पारंपरिक, धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा करना बताया गया। इस कानून के तहत विवाह के बिना शारीरिक संबंध बनाना गैरकानूनी घोषित किया गया है।
कानून की प्रमुख बातें
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बिना शादी संबंध अपराध: नए कानून के अनुसार, शादी से पहले या शादी के बाहर शारीरिक संबंध बनाना दंडनीय अपराध है।
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जेल की सजा का प्रावधान: कानून तोड़ने पर एक साल तक की जेल की सजा हो सकती है।
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लिव-इन रिलेशनशिप पर रोक: बिना शादी के साथ रहना (Live-in Relationship) भी अपराध माना गया है, जिसके लिए छह महीने तक की सजा का प्रावधान है।
विदेशियों पर भी लागू होगा कानून
इस कानून की सबसे अहम और चर्चा में रही बात यह है कि यह सिर्फ इंडोनेशियाई नागरिकों तक सीमित नहीं है। देश में घूमने आए पर्यटकों और विदेशी नागरिकों पर भी यह कानून समान रूप से लागू होता है। यानी यदि कोई विदेशी जोड़ा बिना शादी के साथ रहता है या संबंध बनाता है, तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई संभव है।
कैसे होता है कानून का पालन?
हालांकि इस कानून में एक अहम शर्त भी रखी गई है:
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शिकायत जरूरी: पुलिस स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई नहीं कर सकती। केस तभी दर्ज होगा जब आरोपी के माता-पिता, पति/पत्नी या बच्चे औपचारिक शिकायत दर्ज कराएं।
ऐसे अन्य देश जहां कैजुअल सेक्स पर सख्ती
इंडोनेशिया अकेला देश नहीं है जहां शादी से बाहर संबंधों पर कानूनी रोक है।
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सऊदी अरब: शरिया कानून के तहत शादी से बाहर संबंध अपराध हैं, जिनमें जेल और शारीरिक दंड तक का प्रावधान है।
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ईरान: धार्मिक कानूनों के अनुसार विवाहेतर संबंधों को अपराध माना जाता है।
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कतर: यहां भी पारंपरिक विवाह व्यवस्था को मान्यता दी जाती है और अवैध संबंधों पर सख्त पाबंदी है।
वैश्विक बहस का विषय
इंडोनेशिया का यह कानून अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस का विषय बना हुआ है। समर्थकों का कहना है कि इससे पारंपरिक मूल्यों की रक्षा होगी, जबकि आलोचक इसे निजी जीवन में हस्तक्षेप और मानवाधिकारों के खिलाफ बताते हैं।