
जालंधर:
जालंधर कैंटोनमेंट बोर्ड द्वारा घरों और दुकानों पर लगाए जा रहे भारी-भरकम टैक्स को लेकर इलाके में जबरदस्त रोष देखने को मिल रहा है। व्यापारियों और आम जनता का आरोप है कि बोर्ड ने बिना पर्याप्त सूचना दिए टैक्स लागू करने का फैसला लिया, जो पूरी तरह जनविरोधी है। इस फैसले के खिलाफ कैंट क्षेत्र में जगह-जगह लोगों द्वारा विरोध जताया जा रहा है।
कैंटोनमेंट बोर्ड के पूर्व वाइस प्रेसीडेंट राम अवतार अग्रवाल ने बताया कि वर्ष 2015 में भी बोर्ड ने घरों और दुकानों के टैक्स बढ़ाने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन जनता के कड़े विरोध के चलते उसे वापस लेना पड़ा था। उन्होंने कहा कि तत्कालीन सीईओ मीनाक्षी लोहिया के कार्यकाल में केवल घरों पर ही मामूली टैक्स लगाया गया था। इसके बाद वर्ष 2024 में एक बार फिर टैक्स बढ़ाने को लेकर नोटिस प्रकाशित कर आपत्तियां मांगी गईं, लेकिन नोटिस में यह स्पष्ट नहीं किया गया था कि किस पर कितना टैक्स लगाया जाएगा।
अग्रवाल का कहना है कि जब पब्लिक नोटिस में टैक्स की दरों का कोई स्पष्ट उल्लेख ही नहीं था, तो आम लोग आपत्तियां कैसे दर्ज कर सकते थे।
वहीं समाजसेवक और आरटीआई एक्टिविस्ट ओम प्रकाश शर्मा ने आरोप लगाया कि कैंटोनमेंट बोर्ड ने सार्वजनिक स्थानों पर ठीक से नोटिस बोर्ड नहीं लगाए, जिसके कारण अधिकांश लोगों को टैक्स बढ़ोतरी की जानकारी ही नहीं मिल पाई। उन्होंने कहा कि इसी का फायदा उठाकर अब घरों और दुकानों के मालिकों पर हर महीने भारी टैक्स लगाया जा रहा है, जिससे आम जनता की आमदनी पर सीधा असर पड़ेगा और छोटे दुकानदारों के लिए व्यापार करना मुश्किल हो जाएगा।
बिजली के व्यापार से जुड़े अमृतपाल सिंह लवली ने कहा कि अगर बोर्ड ने समय रहते और सही तरीके से सूचना दी होती, तो जनता अपनी आपत्तियां दर्ज करा सकती थी। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि जिस तरह से अब भारी टैक्स थोपने की तैयारी की जा रही है, उसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। लवली ने कहा कि जनता पहले से ही कई तरह के टैक्स के बोझ तले दबी हुई है।
उल्लेखनीय है कि कैंट क्षेत्र के लगभग हर चौराहे पर आम जनता द्वारा नुक्कड़ मीटिंगें की जा रही हैं और लोग एकजुट होकर इस फैसले का विरोध करने की तैयारी में जुट गए हैं। व्यापारियों ने प्रशासन से टैक्स तुरंत वापस लेने की मांग की है और चेतावनी दी है कि यदि जल्द फैसला वापस नहीं लिया गया तो वे बड़े स्तर पर प्रदर्शन करेंगे।
वहीं इस मामले में जब कैंटोनमेंट बोर्ड के एक उच्च अधिकारी से बात की गई तो उन्होंने बताया कि लोगों की आपत्तियां लेने के लिए जगह-जगह नोटिस लगाए गए थे। बावजूद इसके, टैक्स को लेकर बढ़ते विरोध के चलते आने वाले दिनों में कैंट क्षेत्र में माहौल और गर्माने की संभावना जताई जा रही है।