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CM मान की टिप्पणी पर सुखपाल खैरा का हमला, बोले– बाबा गुरिंदर सिंह जी पर इस्तेमाल की गई भाषा निंदनीय और दुर्भाग्यपूर्ण

CM मान की टिप्पणी पर सुखपाल खैरा का हमला, बोले– बाबा गुरिंदर सिंह जी पर इस्तेमाल की गई भाषा निंदनीय और दुर्भाग्यपूर्ण

चंडीगढ़/भुलत्थ: कांग्रेस के सीनियर नेता और भुलत्थ से विधायक सुखपाल सिंह खैरा ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान द्वारा राधा स्वामी सत्संग ब्यास के प्रमुख बाबा गुरिंदर सिंह ढिल्लों जी के लिए इस्तेमाल की गई भाषा की कड़ी निंदा की है। खैरा ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने बाबा गुरिंदर सिंह जी को सिर्फ इसलिए निशाना बनाया और अपमानजनक व घटिया भाषा का प्रयोग किया, क्योंकि उन्होंने शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया से मुलाकात की थी।

सुखपाल सिंह खैरा ने इस पूरे घटनाक्रम को “बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय” बताते हुए कहा कि एक मौजूदा मुख्यमंत्री द्वारा एक सम्मानित आध्यात्मिक नेता को केवल एक सामाजिक मुलाकात के आधार पर राजनीतिक विवाद में घसीटना मुख्यमंत्री पद की गरिमा के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक और धार्मिक नेता समाज के हर वर्ग के लोगों से मिलते हैं और ऐसी मुलाकातों का राजनीतिकरण करना निंदनीय है।

मजीठिया के खिलाफ दर्ज मामले का जिक्र करते हुए खैरा ने कहा कि पंजाब सरकार और विजिलेंस ब्यूरो अब तक गंभीर आरोपों को साबित करने के लिए सार्वजनिक रूप से कोई ठोस और पुख्ता सबूत पेश नहीं कर पाए हैं। उन्होंने कहा कि माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस मामले में जमानत दिए जाने से यह सवाल और गहरे हो जाते हैं कि इस केस को किस तरह राजनीतिक तौर पर पेश किया गया।

खैरा ने आगे कहा कि बिक्रम सिंह मजीठिया के खिलाफ कथित झूठे केस को लेकर बाबा गुरिंदर सिंह जी द्वारा व्यक्त किए गए विचार अब पूरे पंजाब में गूंज रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि लोगों के बीच यह धारणा मजबूत हो रही है कि आम आदमी पार्टी की सरकार अपने राजनीतिक विरोधियों को फंसाने के लिए राज्य की पुलिस मशीनरी का दुरुपयोग कर रही है। यह स्थिति कानून व्यवस्था और जांच एजेंसियों की निष्पक्षता पर बढ़ते अविश्वास को दर्शाती है।

सुखपाल सिंह खैरा ने कहा, “बाबा गुरिंदर सिंह जी पर सस्ती टिप्पणियां करना और उनकी नीयत या ईमानदारी पर सवाल उठाना उन लाखों अनुयायियों की भावनाओं पर हमला है, जो उनका गहरा सम्मान करते हैं। राजनीतिक मतभेद कभी भी आध्यात्मिक हस्तियों के अपमान को सही नहीं ठहरा सकते।”

अंत में खैरा ने मुख्यमंत्री भगवंत मान से अपील की कि वे पार्टी राजनीति से ऊपर उठकर अपने संवैधानिक पद की गरिमा बनाए रखें और इस तरह की बयानबाजी से बचें।