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अरुणाचल प्रदेश के असाफिला और लोंगजू में भारत-चीन सैनिक आमने-सामने, स्थिति नियंत्रण में

अरुणाचल प्रदेश के असाफिला और लोंगजू में भारत-चीन सैनिक आमने-सामने, स्थिति नियंत्रण में
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अरुणाचल प्रदेश के असाफिला और लोंगजू में भारत-चीन सैनिक आमने-सामने, स्थिति नियंत्रण में

LAC को लेकर दोनों देशों की अलग-अलग धारणाओं के कारण संवेदनशील हैं सीमावर्ती इलाके; फ्लैग मीटिंग और हॉटलाइन से तनाव कम करने की व्यवस्था

ईटानगर। अरुणाचल प्रदेश के असाफिला और लोंगजू सीमावर्ती इलाकों में भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) को लेकर अलग-अलग धारणाओं के कारण संवेदनशील स्थिति बनी हुई है। सूत्रों के अनुसार, नियमित गश्त के दौरान दोनों देशों के सैनिक कभी-कभी आमने-सामने आ जाते हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, फिलहाल जमीनी स्थिति स्थिर और नियंत्रण में है तथा किसी हिंसक टकराव की सूचना नहीं है।

ये दोनों इलाके अरुणाचल प्रदेश के तक्सिंग सर्कल के अंतर्गत आते हैं। LAC के सीमांकन को लेकर भारत और चीन की अलग-अलग समझ के कारण इन क्षेत्रों में गश्त के दौरान आमना-सामना होने की घटनाएं सामने आती रहती हैं।

सैन्य तंत्र के जरिए तनाव कम करने की कोशिश

सूत्रों के मुताबिक, ऐसे मामलों में दोनों पक्षों के स्थानीय सैन्य कमांडर संयम बरतते हुए स्थिति को नियंत्रित रखने का प्रयास करते हैं। आमने-सामने की स्थिति उत्पन्न होने पर तनाव कम करने के लिए पहले से स्थापित सैन्य संवाद तंत्र का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें फ्लैग मीटिंग और हॉटलाइन के जरिए बातचीत जैसे उपाय शामिल हैं।

इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर उत्पन्न तनाव को दूर करना और किसी भी घटना को बड़े टकराव में बदलने से रोकना है।

उच्चस्तरीय बातचीत को भी अहम माना जा रहा

सूत्रों ने पूर्वोत्तर क्षेत्र में कोर कमांडर स्तर की बातचीत का भी उल्लेख किया है। सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए सैन्य अधिकारियों के बीच संवाद को महत्वपूर्ण माना जाता है, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहां वास्तविक नियंत्रण रेखा को लेकर दोनों देशों की धारणाएं अलग-अलग हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, सीमा से जुड़े लंबित मुद्दों के समाधान के लिए स्थानीय सैन्य संवाद के साथ-साथ उच्चस्तरीय बातचीत और कूटनीतिक प्रयास भी आवश्यक हैं। प्रभावी संवाद से सीमावर्ती घटनाओं के कारण तनाव बढ़ने की आशंका को कम करने में मदद मिल सकती है।

सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे पर जोर

सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ दूरदराज के इलाकों में बुनियादी ढांचे और कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। इसमें हर मौसम में उपयोगी सड़कें, पुल, दूरसंचार नेटवर्क और नागरिक सुविधाओं का विकास शामिल है।

बेहतर संपर्क व्यवस्था से सुरक्षा बलों की आवाजाही और स्थानीय निवासियों तक आवश्यक सेवाएं पहुंचाने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा, सड़क और संचार सुविधाओं के विस्तार से सीमावर्ती गांवों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने तथा स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता के अवसर बढ़ने की उम्मीद है।

फिलहाल, असाफिला और लोंगजू जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में स्थिति को शांतिपूर्ण बनाए रखने के लिए सैन्य संयम, स्थापित संवाद तंत्र और दोनों देशों के बीच निरंतर बातचीत को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।