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Thursday, 29 October 2026

जालंधर नगर निगम में कथित अनियमितताओं पर सवाल: मेयर वनीत धीर के कार्यकाल में जांच, टेंडर और जवाबदेही का हिसाब कब?

जालंधर नगर निगम में कथित अनियमितताओं पर सवाल: मेयर वनीत धीर के कार्यकाल में जांच, टेंडर और जवाबदेही का हिसाब कब?

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जालंधर नगर निगम में कथित अनियमितताओं पर सवाल: मेयर वनीत धीर के कार्यकाल में जांच, टेंडर और जवाबदेही का हिसाब कब?

अवैध कॉलोनियों से लेकर स्मार्ट सिटी परियोजना और विकास कार्यों के टेंडरों तक उठे सवाल; जांच की स्थिति और कार्रवाई का विवरण सार्वजनिक करने की मांग

जालंधर। जालंधर नगर निगम की कार्यप्रणाली, विकास कार्यों में पारदर्शिता और सरकारी धन के इस्तेमाल को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। मेयर वनीत धीर के कार्यकाल से संबंधित सार्वजनिक मीडिया रिपोर्टों में अवैध कॉलोनियों, विकास कार्यों के टेंडरों और स्मार्ट सिटी परियोजना से जुड़ी कथित अनियमितताओं का उल्लेख सामने आया है।

इन मामलों में महत्वपूर्ण सवाल यह है कि संबंधित शिकायतों पर अब तक क्या कार्रवाई हुई, जांच कहां तक पहुंची और क्या नगर निगम प्रशासन ने जनता को खर्च, टेंडर आवंटन तथा जांच के निष्कर्षों की स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराई है?

1. अवैध कॉलोनियों के मामले में लोकपाल का नोटिस

द ट्रिब्यून की 28 मई 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, अवैध कॉलोनियों के विस्तार और नगर निगम अधिकारियों की कथित निष्क्रियता को लेकर शिकायत की गई थी। रिपोर्ट में मेयर वनीत धीर सहित अन्य व्यक्तियों को लोकपाल कार्यालय की ओर से नोटिस जारी किए जाने का उल्लेख था।

इस मामले में यह जानना महत्वपूर्ण है कि शिकायत पर आगे क्या कार्रवाई हुई, संबंधित पक्षों ने क्या जवाब दिया और क्या कोई अंतिम आदेश जारी किया गया। केवल नोटिस जारी होने को आरोपों की पुष्टि नहीं माना जा सकता।

2. विकास कार्यों के 67 प्रस्तावों और टेंडर प्रक्रिया पर सवाल

पंजाब केसरी की 12 सितंबर 2025 की रिपोर्ट में नगर निगम के विकास कार्यों से संबंधित 67 प्रस्तावों की जांच और टेंडर प्रक्रिया में कथित मिलीभगत की आशंका का उल्लेख किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्तावों को रद्द करने और जांच के निर्देश दिए जाने की बात सामने आई थी।

अब यह स्पष्ट होना चाहिए कि संबंधित प्रस्तावों और टेंडरों की जांच का क्या परिणाम निकला, कितनी राशि के कार्य प्रभावित हुए और क्या किसी अधिकारी या ठेकेदार के विरुद्ध विभागीय अथवा कानूनी कार्रवाई की गई।

3. कर्मचारियों के रिश्तेदारों से जुड़ी फर्मों को ठेके देने के आरोप

दैनिक जागरण की 28 नवंबर 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, नगर निगम में कर्मचारियों के रिश्तेदारों से जुड़ी फर्मों को विकास कार्यों के ठेके दिए जाने के आरोपों के संबंध में स्थानीय निकाय विभाग ने रिपोर्ट मांगी थी।

ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच से यह स्पष्ट होना चाहिए कि टेंडर निर्धारित नियमों के अनुसार आवंटित किए गए या नहीं, कहीं हितों के टकराव की स्थिति तो नहीं थी और संबंधित विभाग ने क्या कार्रवाई की। उपलब्ध रिपोर्ट के आधार पर मेयर की व्यक्तिगत संलिप्तता का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

4. स्मार्ट सिटी परियोजना के खर्च पर श्वेत पत्र की मांग

द ट्रिब्यून की 9 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, भाजपा नेताओं ने जालंधर स्मार्ट सिटी परियोजना में कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को लेकर प्रदर्शन किया था। नेताओं ने परियोजना के खर्च, टेंडर, भुगतान और जांच की स्थिति का विवरण सार्वजनिक करने के लिए श्वेत पत्र जारी करने की मांग की थी।

इस मामले में जनता को यह जानने का अधिकार है कि परियोजना के लिए कितनी राशि स्वीकृत हुई, कितनी खर्च की गई, किन कार्यों पर भुगतान हुआ और यदि किसी जांच में अनियमितताएं सामने आईं तो उन पर क्या कार्रवाई की गई। हालांकि, राजनीतिक दलों द्वारा लगाए गए आरोपों को जांच के अंतिम निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

5. सीवरेज सफाई के ठेकों और विकास कार्यों पर कांग्रेस के आरोप

द ट्रिब्यून की 15 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, जिला कांग्रेस कमेटी (अर्बन) ने नगर निगम की कार्यप्रणाली, कथित वित्तीय अनियमितताओं और सीवरेज सफाई के ठेकों को लेकर सवाल उठाए थे। रिपोर्ट में कुछ विकास कार्यों के औपचारिक टेंडर प्रक्रिया पूरी होने से पहले शुरू होने के आरोपों का भी उल्लेख था।

इन आरोपों की निष्पक्ष जांच के लिए टेंडर दस्तावेज, वर्क ऑर्डर, कार्य की माप पुस्तिकाएं, भुगतान रिकॉर्ड और संबंधित अधिकारियों की रिपोर्ट की समीक्षा आवश्यक है।

जनता के सामने नगर निगम से पांच अहम सवाल

  1. स्मार्ट सिटी परियोजना: स्वीकृत बजट, वास्तविक खर्च, भुगतान और उपयोगिता प्रमाणपत्रों का विवरण जनता के लिए कहां उपलब्ध है?

  2. टेंडर प्रक्रिया: जिन टेंडरों पर कथित मिलीभगत या अनियमितताओं के आरोप लगे, उनकी जांच का परिणाम क्या रहा?

  3. अवैध कॉलोनियां: शिकायतों और नोटिसों के बाद कितने मामलों में नियमानुसार आगे की कार्रवाई हुई?

  4. ऑडिट और जवाबदेही: CAG या अन्य अधिकृत ऑडिट रिपोर्टों में यदि कोई आपत्तियां दर्ज हैं, तो उन पर विभागीय कार्रवाई की स्थिति क्या है?

  5. जांच की वर्तमान स्थिति: लंबित शिकायतों, जांच रिपोर्टों और कार्रवाई से संबंधित जानकारी 

MERA BHARAT EXPOSE की मांग है कि नगर निगम प्रशासन संबंधित मामलों की स्थिति, टेंडर रिकॉर्ड, खर्च और की गई कार्रवाई का सत्यापित विवरण सार्वजनिक करे, ताकि नागरिक तथ्यों के आधार पर जवाबदेही तय कर सकें।