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Saturday, 24 October 2026

लोहियां खास में हाईवे निर्माण बना राहगीरों के लिए मुसीबत, रेत-मिट्टी के गुबार से हादसों का खतरा बढ़ा

लोहियां खास में हाईवे निर्माण बना राहगीरों के लिए मुसीबत, रेत-मिट्टी के गुबार से हादसों का खतरा बढ़ा

लोहियां खास में हाईवे निर्माण बना राहगीरों के लिए मुसीबत, रेत-मिट्टी के गुबार से हादसों का खतरा बढ़ा

राष्ट्रीय राजमार्ग 703-ए पर सड़क किनारे जमा रेत-मिट्टी से यातायात प्रभावित, खुले टिप्परों की आवाजाही पर भी उठ रहे सवाल

लोहियां खास। राष्ट्रीय राजमार्ग 703-ए पर अमृतसर-जामनगर एक्सप्रेसवे के निर्माण कार्य के चलते सड़क के दोनों ओर जमा हो रही रेत और मिट्टी ने आम जनता तथा राहगीरों की परेशानियां बढ़ा दी हैं। सतलुज पुल गिद्दड़पिंडी से लेकर लोहियां के टी-प्वाइंट से आगे तक कई स्थानों पर सड़क किनारे भारी मात्रा में रेत-मिट्टी जमा होने की बात सामने आई है। इसके कारण यातायात प्रभावित हो रहा है और उड़ती धूल के चलते वाहन चालकों को सामने का रास्ता देखने में भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय स्तर पर इन हालात को सड़क सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय माना जा रहा है।

हाईवे निर्माण के लिए टिप्परों के माध्यम से लगातार रेत और मिट्टी की ढुलाई की जा रही है। हालांकि, सड़क पर बिखरने वाली मिट्टी को नियमित रूप से साफ करने और धूल को नियंत्रित करने के पर्याप्त इंतजाम नजर नहीं आने की शिकायतें सामने आ रही हैं। इसका सबसे अधिक असर दोपहिया वाहन चालकों और साइकिल सवारों पर पड़ रहा है, जिनके लिए सड़क पर संतुलन बनाए रखना मुश्किल हो सकता है।

गिद्दड़पिंडी पुल के आसपास टिप्परों की लंबी कतारें

सतलुज पुल गिद्दड़पिंडी के आसपास मौके का जायजा लेने पर रेत और मिट्टी भरने के लिए बड़ी संख्या में टिप्पर कतारों में खड़े दिखाई दिए। यहां से रेत लादकर लोहियां की ओर जाने वाले वाहनों के कारण हवा में धूल और मिट्टी उड़ने की समस्या बढ़ती दिखाई देती है। गिद्दड़पिंडी, वाड़ा योध सिंह, माणक और साबूवाल के सामने से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग 703-ए पर भी सड़क किनारे जमा रेत-मिट्टी के कारण वाहन चालकों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

खुले टिप्परों से उड़ती मिट्टी, वाहन चालकों की सुरक्षा पर सवाल

स्थानीय हालात के अनुसार, कई टिप्पर बिना तिरपाल ढके रेत और मिट्टी लेकर सड़क पर चलते दिखाई देते हैं। ऐसे वाहनों से उड़ने वाली धूल राहगीरों की आंखों में पड़ती है और उनके कपड़े भी मिट्टी से भर जाते हैं। धूल के घने गुबार के कारण दृश्यता कम होने से दुर्घटना का खतरा और बढ़ सकता है।

सड़क के दोनों ओर जमा रेत की मोटी परत दोपहिया वाहनों और साइकिल सवारों के लिए विशेष रूप से खतरनाक हो सकती है। रेत पर पहियों के फिसलने से वाहन चालक संतुलन खो सकते हैं। क्षेत्र में दुर्घटनाओं और उनमें लोगों के घायल होने या जान गंवाने के दावों की आधिकारिक पुष्टि संबंधित विभागों से किया जाना आवश्यक है।

संबंधित विभागों से कार्रवाई की मांग

इन परिस्थितियों को देखते हुए संबंधित निर्माण एजेंसी, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और यातायात पुलिस की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। सड़क पर जमा रेत-मिट्टी की नियमित सफाई, धूल कम करने के लिए उचित उपाय, टिप्परों को तिरपाल से ढककर ले जाने की व्यवस्था तथा नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों की जांच जैसे कदम उठाए जाने की जरूरत है।

यदि समय रहते उचित प्रबंध नहीं किए गए, तो निर्माण कार्य के दौरान सड़क सुरक्षा से जुड़ी समस्याएं और गंभीर हो सकती हैं। अब देखना होगा कि