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Friday, 30 October 2026

वरियाणा डंप पर कूड़ा प्रबंधन में लापरवाही: नगर निगम जालंधर के कमिश्नर की जवाबदेही तय, 8.40 करोड़ रुपये जमा करवाने के आदेश

वरियाणा डंप पर कूड़ा प्रबंधन में लापरवाही: नगर निगम जालंधर के कमिश्नर की जवाबदेही तय, 8.40 करोड़ रुपये जमा करवाने के आदेश

वरियाणा डंप पर कूड़ा प्रबंधन में लापरवाही: नगर निगम जालंधर के कमिश्नर की जवाबदेही तय, 8.40 करोड़ रुपये जमा करवाने के आदेश

जालंधर: वरियाणा डंप पर कूड़े के उचित प्रबंधन में लगातार बरती जा रही लापरवाही और पर्यावरणीय हर्जाने की बकाया राशि जमा न करवाने के मामले में अब नगर निगम जालंधर के कमिश्नर की जवाबदेही तय की गई है। पंजाब सरकार के एडजुकेटिंग ऑफिसर ने 23 सितंबर 2026 को जारी आदेश में कुल 9.30 करोड़ रुपये के पर्यावरणीय हर्जाने में से शेष 8.40 करोड़ रुपये जमा करवाने के लिए दो महीने की समय-सीमा निर्धारित की है। निर्धारित अवधि में राशि जमा न करवाने की स्थिति में निगम के लिए कानूनी मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की शिकायत पर हुई कार्रवाई में यह बात सामने आई कि बार-बार नोटिस जारी होने, सुनवाई और सुधार के निर्देश दिए जाने के बावजूद नगर निगम वरियाणा डंप की समस्याओं का स्थायी समाधान करने में सफल नहीं रहा। कूड़े की सैग्रीगेशन (गीले और सूखे कचरे को अलग करना), आग से बचाव, कूड़े से निकलने वाले दूषित पानी के प्रबंधन और पुराने कूड़े के निस्तारण जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं में कमियां बनी हुई हैं।

करोड़ों रुपये का पर्यावरणीय हर्जाना लगाए जाने के बावजूद व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नहीं होना नगर निगम की कार्यप्रणाली और अधिकारियों की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

गौरतलब है कि पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने 7 जनवरी 2026 को वरियाणा डंप का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान गीले और सूखे कूड़े को अलग करने की उचित व्यवस्था नहीं मिली। कूड़े के ढेरों में आग लगी हुई थी, कचरे का वजन करने के लिए धर्मकांटा उपलब्ध नहीं था और परिसर में चारदीवारी अथवा पर्याप्त बाड़ की व्यवस्था भी नहीं पाई गई। इसके अलावा कूड़े से निकलने वाले दूषित पानी के प्रबंधन की व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं थी।

इसके बाद 9 फरवरी 2026 को हुई सुनवाई के दौरान नगर निगम के हेल्थ ऑफिसर ने चारदीवारी के निर्माण, पुराने कूड़े के निस्तारण, भूजल की गुणवत्ता की निगरानी के लिए पीजोमीटर लगाने तथा दूषित पानी के प्रबंधन के लिए आवश्यक कदम उठाने का आश्वासन दिया था।

हालांकि, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने दर्ज किया कि नगर निगम की ओर से कूड़ा प्रबंधन योजना को लेकर न तो कोई स्पष्ट प्रगति रिपोर्ट पेश की गई और न ही ठोस प्रस्ताव तथा कार्य पूरा करने की निर्धारित समय-सीमा प्रस्तुत की गई। परिणामस्वरूप निगम को बार-बार सुधारात्मक निर्देश जारी करने पड़े।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि 8.40 करोड़ रुपये का बकाया पर्यावरणीय हर्जाना निर्धारित दो महीने में जमा करवाया जाएगा या नहीं? साथ ही, वरियाणा डंप पर वर्षों से बनी हुई कूड़ा प्रबंधन की समस्याओं का स्थायी समाधान कब होगा और इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही किस स्तर पर तय की जाएगी?