अमृतसर में रेव पार्टियों और ऑनलाइन नेटवर्क के जरिए देह व्यापार का जाल?
पुलिस की कार्रवाई के बावजूद अवैध गतिविधियों पर पूरी तरह लगाम नहीं
जैसे-जैसे समाज तकनीकी रूप से आगे बढ़ रहा है, वैसे-वैसे अपराध के तरीके भी आधुनिक होते जा रहे हैं। अमृतसर में रेव पार्टियों और कथित सेक्स-थीम इवेंट्स के जरिए नशा और देह व्यापार के नेटवर्क के सक्रिय होने की चर्चा ने एक बार फिर कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सूत्रों के मुताबिक, कुछ होटलों में अंदरखाते इस तरह की पार्टियों के आयोजन की शिकायतें सामने आई हैं। हालांकि पुलिस ने समय-समय पर रेड कर मामले दर्ज किए हैं, लेकिन इसके बावजूद अवैध गतिविधियों पर पूरी तरह रोक नहीं लग पाई है। कई बार छापेमारी हुक्का बार या लाइसेंस उल्लंघन तक सीमित रह जाती है, जबकि बड़े नेटवर्क पर ठोस कार्रवाई की मांग उठती रही है।
सोशल मीडिया और एप्स के जरिए बुकिंग का आरोप
जानकारी के अनुसार, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, निजी ग्रुप्स और मैसेजिंग एप्स के जरिए कथित तौर पर रेव व थीम पार्टियों की बुकिंग की जाती है। अलग-अलग शहरों से युवतियों को बुलाए जाने और मोटी रकम के लेन-देन की भी बातें सामने आई हैं।
बताया जाता है कि इस अवैध धंधे में दलाल अहम कड़ी का काम करते हैं, जो ग्राहकों और महिलाओं के बीच संपर्क स्थापित करते हैं। ग्राहकों की पसंद के अनुसार रेट तय कर लोकेशन साझा की जाती है।
हाईटेक हुआ नेटवर्क
एंड्रॉयड फोन, सोशल मीडिया और इंटरनेट प्लेटफॉर्म्स ने इस तरह के नेटवर्क को और जटिल बना दिया है। कथित तौर पर वेबसाइट्स और फर्जी प्रोफाइल बनाकर ग्राहकों से संपर्क साधा जाता है। ऑनलाइन पेमेंट और एन्क्रिप्टेड चैट के जरिए बातचीत होने से पुलिस के लिए ट्रैकिंग चुनौतीपूर्ण हो जाती है।
सूत्रों का दावा है कि इस अवैध कारोबार में 1000 रुपए से लेकर 20,000 रुपए या उससे अधिक तक की डील की जाती है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
पुलिस की मुहिम और चुनौतियां
अमृतसर पुलिस ने पहले भी इस तरह के नेटवर्क के खिलाफ अभियान चलाकर कई लोगों को गिरफ्तार किया था, जिससे कुछ समय के लिए गतिविधियों में कमी आई। लेकिन अब फिर से सक्रियता बढ़ने की चर्चाएं हैं।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया मॉनिटरिंग बढ़ाई जा रही है और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। आम जनता से भी अपील की गई है कि किसी भी अवैध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें।
सामाजिक और कानूनी पहलू
विशेषज्ञों का मानना है कि देह व्यापार और नशे से जुड़े नेटवर्क केवल कानून-व्यवस्था का ही नहीं, बल्कि सामाजिक ताने-बाने और युवाओं के भविष्य का भी गंभीर मुद्दा हैं। जागरूकता, सख्त कानून प्रवर्तन और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की निगरानी से ही ऐसे अवैध धंधों पर प्रभावी रोक संभव है।
फिलहाल, पुलिस की जांच और आगामी कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं।