जालंधर, 18 मार्च : जिला मैजिस्ट्रेट-कम-डिप्टी कमिश्नर जालंधर डा. हिमांशु अग्रवाल ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत प्राप्त अधिकारों का उपयोग करते हुए जनहित और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आदेश जारी किए है कि जिला जलंधर की सीमा के अंदर आने वाले सभी दरिया, उनके प्राकृतिक रास्ते (River course/River bed), फ्लड प्लेन या पानी के बहाव वाले क्षेत्र में बिना किसी पूर्व अनुमति के किसी भी प्रकार के बड़े पेड़, जैसे सफेदा, पॉपुलर आदि लगाने पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध होगा।
आदेशों के अनुसार यह पाबंदी हर प्रकार की भूमि पर लागू होगी, चाहे वह सरकारी, पंचायती या किसी भी तरह की निजी स्वामित्व वाली हो, क्योंकि नदी के बहाव वाले क्षेत्र में किसी भी प्रकार की रुकावट जन सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकती है।
आदेशों में कहा गया है कि उनके ध्यान में आया है कि जिला जलंधर की सीमा के साथ बहने वाली सतलुज नदी और इसकी सहायक दरियां/चों के बहाव वाले क्षेत्र (River course/River bed) में कुछ व्यक्तियों द्वारा सफेदा, पॉपुलर और अन्य प्रकार के बड़े पेड़ लगाए जा रहे हैं। दरिया के प्राकृतिक बहाव वाले क्षेत्र में इस तरह पेड़ लगाने से पानी के बहाव में रुकावट पैदा होती है, जिससे बारिश के मौसम में बाढ़ की संभावना बढ़ जाती है और जान-माल की हानि का गंभीर खतरा बना रहता है। नदी के अंदरूनी हिस्से में ऐसी गतिविधि पानी की प्राकृतिक निकासी को प्रभावित करती है, जो जन सुरक्षा के लिए चिंताजनक है और पंजाब कैनाल एवं ड्रेनेज एक्ट, 2023 के तहत दंडनीय अपराध है।
यह आदेश 12 मई 2026 तक लागू रहेगा।