जालंधर : कांग्रेस के लिए पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 का रास्ता भी आसान नहीं है।
पंजाब में विधानसभा चुनाव तो चुनौती है ही, लेकिन इससे पहले कई धड़ों में बंटे कांग्रेसी नेताओं को एकजुट करना सबसे बड़ी चुनौती है आप को बता दें कि सूत्रों से मिली जानकारी से पता चल रहा है कि कांग्रेस हाईकमान पंजाब नेतृत्व में बदलाव को लेकर इंकार कर चुके है, लेकिन अंदरखाते हाईकमान भी इस बात से भली भांति परिचित है कि पंजाब में सब ठीक नहीं है।पंजाब में कांग्रेसी नेताओं के हालात देखते हुए हाईकमान ने बड़ा फैसला लिया है। कांग्रेस हाईकमान ने पंजाब में कांग्रेस के राजनीतिक हालात का आकलन करने के लिए तीन पर्यवेक्षक नियुक्त कर दिए हैं।
हाईकमान द्वारा पंजाब में कांग्रेस के हालात जानने के लिए तीन राजनीतिक लोगों को जिनमें अजय माकन, मीनाक्षी नटराजन तथा भजन लाल जाटव को नियुक्त किया है।
माकन कांग्रेस के कोषाध्यक्ष, नटराजन पार्टी की तेलंगाना प्रभारी और जाटव राजस्थान के करौली-धौलपुर लोकसभा सदस्य हैं।हाईकमान ने कहा है कि ये तीनों बड़े नेता पंजाब के मौजूदा राजनीतिक हालात का बारीकी से जांचेगे और फिर रिपोर्ट सबमिट करेंगे हाईकमान के इस फैसले को लेकर राजनीतिक माहिरों का मानना है कि पंजाब में बड़ा बदलाव होगा और लगभग तय भी है।
लेकिन, हाईकमान इस मामले में किसी भी धड़े का नाराजगी मोल लेकर विधानसभा चुनावों में कोई जोखिम नहीं उठाना चाहता। जिस कारण से तीन सदस्य कमेटी की रिपोर्ट तक फैसला टाल दिया है।बीते विधानसभा चुनाव 2022 से बिखरी कांग्रेस आज तक बिखरी ही हुई है। पूर्व सीएम चरनजीत चन्नी की बात करें या फिर प्रदेश प्रधान राजा वडिंग की, सुखजिन्द्र रंधावा हो या फिर प्रताप बाजवा... बेशक सभी एकजुटता दावा करते नज़र आते हैं, लेकिन मौजूदा हालात किसी से छिपे नहीं है। हर नेता अपने अलग धड़ा बना कर चल रहा है।कांग्रेस गुटबाजी का असर विधानसभा चुनाव 2027 पर पड़ना तय है। अगर सभी कांग्रेसी नेता ऐसे ही चले तो साफ है कि कांग्रेस एक बार फिर सत्ता की रेस से चुनावों से पहले ही बाहर हो जाएगी सूत्रों का मानना है कि कांग्रेस के मौजूदा हालात देखते हुए राजनीतिक माहिर मानते हैं कि प्रदेश की कमान संभालने को लेकर चन्नी ही अन्य नेता राजा वडिंग, सुखी रंधावा, विजय इंद्र सिंगला और प्रताप बाजवा से ज्यादा प्रभावी है।इसका मुख्य कारण ये है कि वे पंजाब के पूर्व सीएम रह चुके हैं और चन्नी ने अपने संक्षिप्त कार्यकाल में प्रदेश की जनता पर अलग प्रभाव छोड़ा। जबकि इसके विपरीत राजा वडिंग, प्रताप बाजवा, सुखी रंधावा और अब रेस में शामिल हुए विजय इंद्र सिंगला का अपने हल्कों में तो प्रभाव हो सकता है, लेकिन प्रदेश का राजनीतिक भविष्य तय करने वाले दोआबा में कुछ खास प्रभाव नहीं है।आने वाले समय में पता चलेगा कि हाईकमान द्वारा गठित कमेटी पंजाब में कांग्रेसी नेताओं को एकजुट करने के लिए कुछ कर पाती है या फिर नहीं