जालंधर शहर में अवैध कॉलोनियों का मुद्दा एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। ताजा मामले में हल्का इंचार्ज और (पार्षदपति) पर नगर निगम को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाने के आरोप लगे हैं। दोनों पर मिलीभगत कर एक और अवैध कॉलोनी काटने का आरोप है।
सूत्रों के अनुसार, संबंधित क्षेत्र में बिना किसी वैध मंजूरी के कॉलोनी विकसित की गई। नियमों के तहत कॉलोनी काटने से पहले नगर निगम से नक्शा पास करवाना और विकास शुल्क जमा कराना जरूरी होता है, लेकिन इस मामले में इन सभी नियमों की अनदेखी की गई।
बताया जा रहा है कि इस पूरे खेल में स्थानीय स्तर पर संरक्षण मिलने के कारण अवैध कॉलोनी का काम बेखौफ जारी रहा। आरोप है कि इससे नगर निगम को लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ।
इस मामले में वर्तमान पार्षद के पति बताए जा रहे हैं, की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। चर्चा है कि उन्होंने कथित तौर पर इस अवैध कॉलोनी को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाई।
मामला सामने आने के बाद अब नगर निगम प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच करवाई जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
वहीं, नगर निगम के उच्च अधिकारियों का कहना है कि यदि शिकायत में सच्चाई पाई जाती है, तो किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा और नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।