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जालंधर इंप्रूवमेंट ट्रस्ट को उपभोक्ता आयोग का झटका, 72 वर्षीय महिला को ₹4.54 लाख ब्याज सहित लौटाने के आदेश

13 Oct 2026 | 68 Views

जालंधर इंप्रूवमेंट ट्रस्ट को उपभोक्ता आयोग का झटका, 72 वर्षीय महिला को ₹4.54 लाख ब्याज सहित लौटाने के आदेश

जालंधर इंप्रूवमेंट ट्रस्ट को उपभोक्ता आयोग का झटका, 72 वर्षीय महिला को ₹4.54 लाख ब्याज सहित लौटाने के आदेश

RTI से जुटाए सबूत बने अहम आधार, मानसिक परेशानी के लिए ₹30 हजार और मुकदमे के खर्च के ₹10 हजार भी देने होंगे

जालंधर (Mera Bharat News): जालंधर इंप्रूवमेंट ट्रस्ट को मास्टर गुरबंता सिंह एनक्लेव की आवासीय योजना में फ्लैट आवंटन और बुनियादी सुविधाओं की कथित कमी के मामले में जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग से झटका लगा है। आयोग ने 72 वर्षीय सुदर्शन टांगरी की शिकायत पर फैसला सुनाते हुए ट्रस्ट को जमा करवाई गई ₹4,54,677 की राशि 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित वापस करने के निर्देश दिए हैं।

इसके अतिरिक्त आयोग ने मानसिक परेशानी के मुआवजे के रूप में ₹30,000 और मुकदमे के खर्च के लिए ₹10,000 देने का आदेश दिया है। ट्रस्ट को पूरी अदायगी के लिए 45 दिन का समय दिया गया है। निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं करने पर ब्याज दर में 3 प्रतिशत की अतिरिक्त बढ़ोतरी के निर्देश भी दिए गए हैं।

2006 में बुक किया था LIG फ्लैट, सुविधाएं नहीं मिलने का आरोप

शिवराज गढ़ निवासी सुदर्शन टांगरी ने शिकायत में बताया कि उन्होंने वर्ष 2006 में इंद्रपुरम विकास योजना के तहत ब्लॉक-ए की दूसरी मंजिल पर स्थित LIG फ्लैट नंबर 78 बुक करवाया था। इसके लिए उन्होंने अलग-अलग किस्तों में कुल ₹4,54,677 जमा करवाए।

शिकायतकर्ता के अनुसार, उन्हें वास्तविक और रहने योग्य कब्जा देने के बजाय केवल कागजी कब्जा सौंपा गया। उनका आरोप था कि फ्लैट का निर्माण उचित ढंग से नहीं किया गया और परिसर में रहने के लिए जरूरी बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव था।

शिकायत में 45 फीट चौड़ी पहुंच सड़क, पेयजल आपूर्ति, बिजली व्यवस्था, चालू सीवरेज लाइन और कम्युनिटी हॉल जैसी सुविधाएं उपलब्ध नहीं होने का मुद्दा उठाया गया। यह भी कहा गया कि बिजली की मुख्य लाइनें और ट्रांसफार्मर वर्ष 2012-2013 के दौरान चालू हो सके। इन परिस्थितियों के कारण फ्लैट में रहने में परेशानी हुई और उनकी जमा पूंजी लंबे समय तक फंसी रही।

इंप्रूवमेंट ट्रस्ट ने क्या दी दलील?

सुनवाई के दौरान जालंधर इंप्रूवमेंट ट्रस्ट ने दलील दी कि शिकायतकर्ता को फ्लैट का कब्जा पहले ही दिया जा चुका था और शिकायत निर्धारित समय-सीमा के बाद दाखिल की गई थी। ट्रस्ट ने यह भी कहा कि फ्लैट ‘जैसा है, जहां है’ के आधार पर आवंटित किए गए थे तथा उनके रखरखाव की जिम्मेदारी आवंटियों की थी।

हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दोनों पक्षों के साक्ष्यों की समीक्षा के दौरान आयोग ने पाया कि ट्रस्ट आवश्यक कंप्लीशन सर्टिफिकेट प्रस्तुत करने में विफल रहा। आयोग ने बुनियादी सुविधाओं और पूर्णता प्रमाण पत्र से जुड़े पहलुओं को ध्यान में रखते हुए शिकायतकर्ता को राहत प्रदान की।

RTI से मिली जानकारी ने मजबूत किया पक्ष

इस मामले में सूचना का अधिकार (RTI) कानून के तहत प्राप्त जानकारी भी महत्वपूर्ण रही। सुदर्शन टांगरी ने संबंधित जानकारी आयोग के समक्ष साक्ष्य के रूप में पेश की, जिससे आवासीय योजना में बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता को लेकर उनके पक्ष को मजबूती मिली।

बताया गया है कि बीबी भानी फ्लैट अलॉटी एसोसिएशन के प्रधान दर्शन ने भी कानूनी सलाह के संबंध में उनका सहयोग किया।

फ्लैट खरीदारों के लिए अहम संदेश

यह फैसला उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है, जो सरकारी या विकास प्राधिकरणों की आवासीय योजनाओं में अपनी जमा पूंजी निवेश करते हैं और बाद में बुनियादी सुविधाओं या रहने योग्य कब्जे को लेकर परेशानियों का सामना करते हैं।

मामले से यह भी स्पष्ट होता है कि संबंधित दस्तावेज, शिकायतें और RTI के माध्यम से प्राप्त सरकारी रिकॉर्ड उपभोक्ता विवादों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि, प्रत्येक मामले का निर्णय उसके तथ्यों, उपलब्ध साक्ष्यों और लागू कानून के आधार पर किया जाता है।

अब आदेश के अनुसार जालंधर इंप्रूवमेंट ट्रस्ट को निर्धारित समय में राशि, ब्याज और मुआवजे का भुगतान करना होगा।

Published on: 13 Oct 2026

Global Admin
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