जालंधर। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक कथित मामले ने देश में जेंडर-न्यूट्रल यौन अपराध कानूनों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। दावा किया जा रहा है कि जालंधर के एक युवक ने चार महिलाओं पर उसका अपहरण कर यौन उत्पीड़न करने का आरोप लगाया है। हालांकि, इस मामले की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।
वायरल जानकारी के अनुसार, युवक ने आरोप लगाया है कि चार महिलाओं ने रास्ता पूछने के बहाने उससे बातचीत शुरू की। इसके बाद कथित तौर पर उसके चेहरे पर कोई स्प्रे किया गया, जिससे वह अचेत जैसी अवस्था में पहुंच गया। युवक का दावा है कि इसके बाद उसे जबरन एक वाहन में बैठाया गया और उसके साथ उत्पीड़न किया गया। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि उसे जबरदस्ती शराब पिलाई गई।
फिलहाल इस मामले को लेकर सोशल मीडिया पर विभिन्न दावे किए जा रहे हैं, लेकिन संबंधित एजेंसियों या पुलिस की ओर से आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। इसलिए इन आरोपों की सत्यता की जांच होना अभी बाकी है।
इस कथित घटना के बाद भारत में जेंडर-न्यूट्रल यौन अपराध कानूनों की आवश्यकता पर चर्चा तेज हो गई है। कानूनी विशेषज्ञों और अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि मौजूदा कानूनों में यौन अपराधों की कई धाराएं विशेष परिस्थितियों तक सीमित हैं, जिसके चलते पुरुष, ट्रांसजेंडर और LGBTQ+ समुदाय से जुड़े पीड़ितों को न्याय पाने में चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि जहां बच्चों को संरक्षण देने वाले कानूनों में जेंडर-न्यूट्रल दृष्टिकोण अपनाया गया है, वहीं वयस्क पीड़ितों के लिए समान कानूनी सुरक्षा को लेकर अभी भी व्यापक चर्चा और सुधार की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
इस बीच, सोशल मीडिया पर वायरल इस मामले ने कानूनी सुधार, पीड़ितों के अधिकारों और सभी लिंगों के लिए समान न्याय व्यवस्था की जरूरत पर राष्ट्रीय स्तर पर बहस को फिर से केंद्र में ला दिया है।