फगवाड़ा। करीब तीन साल पहले बंद हुई जेसीटी मिल के लगभग 24 हजार पूर्व कर्मचारियों के लिए राहत की खबर सामने आई है। लंबित ईपीएफ राशि का भुगतान अगले 15 दिनों में शुरू होने की उम्मीद जताई गई है। सांसद डॉ. राज कुमार चब्बेवाल ने पूर्व कर्मचारियों के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के बाद यह भरोसा दिया। एडीसी रणदीप सिंह हीर के अनुसार, जेसीटी ट्रस्ट ने ईपीएफओ के पास करीब 124 करोड़ रुपये जमा करवाए हैं, जिनमें फगवाड़ा यूनिट के 81 करोड़ रुपये शामिल हैं। सत्यापित डाटा पोर्टल पर अपलोड होने के बाद पात्र कर्मचारी नियमानुसार अपने पीएफ खाते से करीब 80 प्रतिशत तक राशि निकालने के लिए आवेदन कर सकेंगे।
बड़े उद्योगों में मजदूरों के शोषण पर आखिर कब लगेगी लगाम?
आज के दौर में भी मजदूर वर्ग अपने मेहनताने और कानूनी अधिकारों के लिए लंबा इंतजार करने को मजबूर है। केंद्र सरकार चाहे नए लेबर कोड लागू करने और श्रमिकों के हितों की सुरक्षा के लिए कितने भी प्रावधान क्यों न लेकर आए, असली सवाल उनके प्रभावी क्रियान्वयन का है। यदि किसी मजदूर को अपनी ही मेहनत की कमाई और भविष्य की सुरक्षा के लिए वर्षों तक संघर्ष करना पड़े, तो श्रम कानूनों के संरक्षण का वास्तविक लाभ उस तक पहुंचने पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
जेसीटी मिल के पूर्व कर्मचारियों का मामला इसी व्यवस्था की एक गंभीर तस्वीर सामने लाता है। जिन श्रमिकों ने अपनी जिंदगी का महत्वपूर्ण हिस्सा मिल में काम करते हुए बिताया, उनके लिए भविष्य निधि की राशि केवल एक आर्थिक भुगतान नहीं, बल्कि परिवार की जरूरतों, बच्चों की शिक्षा, इलाज और बुढ़ापे की सुरक्षा का सहारा है। इस राशि के भुगतान में देरी से श्रमिकों और उनके परिवारों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
600 परिवारों की परेशानी भी कम नहीं
मिल बंद होने के बाद अगस्त 2025 में बिजली विभाग द्वारा क्वार्टरों की बिजली काटे जाने की खबर भी सामने आई थी। बताया गया कि तब से करीब 600 परिवार अंधेरे में रहने को मजबूर हैं। यह स्थिति श्रमिकों की समस्याओं को और गंभीर बनाती है। रोजगार का साधन बंद होने के बाद यदि परिवारों को बिजली जैसी बुनियादी सुविधा के लिए भी संघर्ष करना पड़े, तो संबंधित विभागों और प्रशासन को मानवीय दृष्टिकोण से समाधान तलाशना चाहिए।
श्रमिकों को आश्वासन नहीं, समय पर अधिकार चाहिए
जेसीटी मिल के मामले में प्रशासन और संबंधित संस्थाओं को चाहिए कि ईपीएफ भुगतान की प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से पूरी की जाए, कर्मचारियों के रिकॉर्ड का सत्यापन शीघ्र हो और पात्र श्रमिकों को बिना अनावश्यक देरी के उनकी देय राशि मिल सके। साथ ही, मिल के क्वार्टरों में रहने वाले परिवारों की समस्याओं का भी उचित समाधान किया जाना चाहिए।
मजदूर किसी पर एहसान नहीं मांगता, वह अपनी मेहनत का हक मांगता है। श्रम कानूनों की सफलता केवल नए प्रावधान बनाने में नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करने में है कि किसी भी श्रमिक को अपनी ही कमाई पाने के लिए सालों तक इंतजार और संघर्ष न करना पड़े।