पंजाबी की एक मशहूर कहावत है, “अंधा बांटे रेवड़ियां, बार-बार अपने ही को दे”, जो मौजूदा पंजाब सरकार पर पूरी तरह लागू होती है। सिक्योरिटी सिस्टम को लेकर ये विचार अखिल भारतीय शिवसेना राष्ट्रवादी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील तांगड़ी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार और पंजाब पुलिस द्वारा सिक्योरिटी देने का कोई स्पष्ट मापदंड नहीं अपनाया जा रहा। अपने पसंदीदा लोगों को बिना किसी ठोस आधार के सुरक्षा प्रदान की जाती है, जबकि जो लोग सरकार की नीतियों से असहमत होकर पार्टी छोड़ देते हैं, उनकी सिक्योरिटी तुरंत वापस ले ली जाती है।
तांगड़ी ने आरोप लगाया कि हाल ही में आम आदमी पार्टी के 7 राज्यसभा सदस्यों द्वारा पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल होने के बाद उनकी सिक्योरिटी हटा ली गई, जिससे यह स्पष्ट होता है कि सरकार और पुलिस केवल अपने चहेतों को खुश करने में लगी हुई है, न कि वास्तविक खतरे का आकलन करने में।
उन्होंने जालंधर का उदाहरण देते हुए कहा कि हरभजन सिंह की सिक्योरिटी भी बिना किसी ठोस कारण के हटा ली गई। यदि ऐसी स्थिति में कोई अप्रिय घटना हो जाती है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? उन्होंने कहा कि पंजाब में मौजूदा हालातों से सरकार और पुलिस भली-भांति परिचित है, इसके बावजूद इस तरह के फैसले लिए जा रहे हैं।
तांगड़ी ने मशहूर गायक सिद्धू मूसेवाला का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी सिक्योरिटी हटाए जाने के बाद ही वे गैंगस्टरों का शिकार बने थे, और आज भी पंजाब में इसी तरह के हालात बने हुए हैं जहां आए दिन गैंगस्टर घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं।
उन्होंने आगे कहा कि जिन्होंने पंजाब में अमन-शांति बनाए रखने के लिए आतंकवादियों से लोहा लिया और अपनी जान की परवाह किए बिना समाज के लिए काम किया, आज उनकी सुरक्षा की अनदेखी की जा रही है। इसके विपरीत, सरकार अपने चहेते नेताओं को खुश करने के लिए सिक्योरिटी सिस्टम का दुरुपयोग कर रही है।
अंत में तांगड़ी ने कहा कि उनकी पार्टी इस मुद्दे का पुरजोर विरोध करती है और पंजाब पुलिस से मांग करती है कि बिना किसी मापदंड के सिक्योरिटी देने और वापस लेने की प्रक्रिया पर तुरंत लगाम लगाई जाए।