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स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने फिल्म ‘सतलुज’ को ओटीटी से हटाए जाने पर उठाए सवाल, पंजाब के काले दौर पर न्याय की मांग

07 Jul 2026 | 72 Views

स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने फिल्म ‘सतलुज’ को ओटीटी से हटाए जाने पर उठाए सवाल, पंजाब के काले दौर पर न्याय की मांग

 स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने फिल्म ‘सतलुज’ को ओटीटी से हटाए जाने पर उठाए सवाल, पंजाब के काले दौर पर न्याय की मांग

 केंद्र सरकार से पूछा— पंजाब की सच्चाई से इतना डर क्यों, कांग्रेस शासनकाल की घटनाओं पर भी उठाए प्रश्न

चंडीगढ़, 6 जुलाई। पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने अभिनेता एवं गायक दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलुज’ को ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटाए जाने के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरते हुए कई सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि फिल्म को कुछ ही दिनों के भीतर प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया, जिससे यह प्रश्न खड़ा होता है कि केंद्र सरकार सच्चाई से इतना डरती क्यों है।

संधवां ने कहा कि कांग्रेस के शासनकाल के दौरान पंजाब में हजारों नौजवानों की कथित तौर पर गैर-कानूनी हत्याएं हुईं और बड़ी संख्या में युवक लापता हो गए। उन्होंने कहा कि कई परिवार आज तक अपने प्रियजनों के बारे में न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं। अनेक माताएं अपने बेटों की राह देखते-देखते इस दुनिया से चली गईं और कई परिवारों को अपने बच्चों के मृत्यु प्रमाण पत्र तक नहीं मिले।

उन्होंने कहा कि यह पंजाब के इतिहास का एक काला अध्याय है, जिसके बारे में आने वाली पीढ़ियों को जानकारी होनी चाहिए। संधवां के अनुसार, इन्हीं घटनाओं पर आधारित फिल्म ‘सतलुज’ को पिछले तीन वर्षों से रिलीज होने की अनुमति नहीं मिली थी और सेंसर बोर्ड की ओर से इस पर 127 कट लगाए गए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि दूसरी ओर कुछ अन्य फिल्में बिना किसी बाधा के रिलीज होती रहीं।

स्पीकर ने कहा कि जब ‘सतलुज’ बिना किसी कट के ओटीटी प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हुई तो उसे जल्द ही हटा दिया गया। उन्होंने केंद्र सरकार से इस संबंध में जवाब मांगते हुए कहा कि पंजाब के दर्द और इतिहास से जुड़े मुद्दों को सामने आने से क्यों रोका जा रहा है।

संधवां ने कांग्रेस पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उसके शासनकाल के दौरान मारे गए हजारों युवाओं के परिवारों को न्याय मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी सच्ची कहानी को लोगों तक पहुंचने से रोकना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और इसे सच्चाई दबाने की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है।

उन्होंने दावा किया कि फिल्म ‘सतलुज’ कोई काल्पनिक कहानी नहीं है, बल्कि यह सीबीआई जांच और विभिन्न आधिकारिक अदालती दस्तावेजों पर आधारित एक दस्तावेजी प्रस्तुति है, जो पंजाब के इतिहास के एक संवेदनशील दौर को सामने लाने का प्रयास करती है।

संधवां ने आगे कहा कि भाई जसवंत सिंह खालड़ा ने मानवाधिकारों के लिए महत्वपूर्ण संघर्ष किया था और उनकी कुर्बानी से लोगों को अवगत कराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पंजाब को न्याय की आवश्यकता है और राज्य के इतिहास से जुड़े तथ्यों को दबाया नहीं जाना चाहिए।

Published on: 07 Jul 2026

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