मतदाता सूचियों पर सवाल, कांग्रेस ने चुनाव आयोग से मांगा जवाब
सतिंदर पाल सिंह लक्की बिंद्रा बोले—चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर स्थिति स्पष्ट करे आयोग
जालंधर। चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूचियों से जुड़े हालिया दावों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। जिला शहरी कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष सतिंदर पाल सिंह लक्की बिंद्रा ने कहा कि 23 सितंबर की एक जांच रिपोर्ट में चुनाव आयोग के भीतर मतदाता पंजीकरण और मतदाता डेटाबेस से जुड़े कुछ फैसलों पर गंभीर आपत्तियां दर्ज किए जाने का दावा किया गया है।
बिंद्रा के अनुसार, रिपोर्ट में कहा गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों के दौरान कम से कम 14 अवसरों पर चुनाव आयोग के कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं को लेकर लिखित आपत्तियां दर्ज कीं। उनके मुताबिक, इन आपत्तियों का संबंध नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाताओं के नाम जोड़ने या हटाने, नाम बहाल करने, फॉर्म-6 में बदलाव तथा मतदाता डेटाबेस से जुड़े आईटी सिस्टम से बताया गया है।
बिंद्रा ने दावा किया कि रिपोर्ट में दोनों आयुक्तों की ओर से कुछ प्रक्रियाओं को लेकर “अनधिकृत” और “गैरकानूनी” जैसे शब्दों में आपत्ति जताए जाने तथा मतदाता डेटाबेस के केंद्रीकरण को लेकर चिंता व्यक्त किए जाने का उल्लेख है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित दस्तावेजों की पूरी पृष्ठभूमि को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया जाना आवश्यक है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि यदि चुनाव आयोग के भीतर से ही इस तरह की आपत्तियां दर्ज हुई हैं, तो चुनाव आयोग को इन पर देश के सामने स्पष्ट स्थिति रखनी चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार से भी मामले पर जवाब देने की मांग की। बिंद्रा ने कहा कि मतदाता सूची केवल प्रशासनिक रिकॉर्ड नहीं है, बल्कि प्रत्येक पात्र नागरिक के मतदान के अधिकार से सीधे जुड़ी है। इसलिए मतदाता सूची तैयार करने और उसमें संशोधन की प्रक्रिया पारदर्शी तथा जांच योग्य होनी चाहिए।
उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा लंबे समय से मतदाता सूचियों की पारदर्शिता और कथित “वोट चोरी” को लेकर उठाए जा रहे सवालों का भी उल्लेख किया। बिंद्रा ने कहा कि राहुल गांधी ने कथित “वोट चोरी” को भारतीय नागरिकों के अधिकार और संविधान से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया है।
हालांकि, “वोट चोरी” संबंधी आरोप कांग्रेस और राहुल गांधी के राजनीतिक दावे हैं। चुनाव आयोग और सत्तारूढ़ पक्ष इन आरोपों को खारिज करते रहे हैं। ऐसे में पूरे मामले में वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए संबंधित चुनावी रिकॉर्ड, आपत्तियों और आयोग की आधिकारिक प्रतिक्रियाओं को सामने रखना महत्वपूर्ण होगा।
बिंद्रा ने मांग की कि मतदाता पंजीकरण, नाम जोड़ने-हटाने और डेटाबेस प्रबंधन से संबंधित प्रक्रियाओं की जानकारी सार्वजनिक की जाए, ताकि मतदाताओं के बीच किसी भी प्रकार की आशंका की स्थिति न रहे। उन्होंने कहा कि चुनावी व्यवस्था में जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए पारदर्शिता और जवाबदेही आवश्यक है।