जालंधर कुंज के सामने कपूरथला रोड पर शराब का ठेका बना लोगों के लिए परेशानी, अचानक ब्रेक लगाने से हादसों का खतरा!
हाईवे से 500 मीटर दूरी के नियम पर उठे सवाल, क्या आबकारी विभाग और ट्रैफिक पुलिस करेंगे जांच?
जालंधर: कपूरथला रोड पर जालंधर कुंज के सामने स्थित शराब का ठेका अब राहगीरों और वाहन चालकों के लिए परेशानी का कारण बनता नजर आ रहा है। सड़क के बिल्कुल नजदीक स्थित इस ठेके के कारण वाहन चालकों को अचानक ब्रेक लगानी पड़ती है, जिससे पीछे से आ रहे वाहनों के टकराने और सड़क हादसे होने का खतरा बना रहता है।
स्थानीय लोगों और राहगीरों के अनुसार, ठेके को देखकर कई वाहन चालक अचानक अपने वाहन रोक देते हैं। ऐसे में पीछे से आ रहे वाहन चालकों को संभलने का पर्याप्त समय नहीं मिल पाता। इससे सड़क पर दुर्घटना की आशंका बढ़ जाती है। लोगों का सवाल है कि क्या इस ठेके की मौजूदा स्थिति आम जनता की सड़क सुरक्षा के लिए खतरा बन रही है?
500 मीटर दूरी के नियम पर उठे सवाल
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों के आसपास शराब की बिक्री को लेकर दूरी संबंधी दिशा-निर्देश निर्धारित किए हैं। सामान्य तौर पर राजमार्ग के किनारे शराब की दुकानों के लिए 500 मीटर की दूरी का प्रावधान है, जबकि 20,000 या इससे कम आबादी वाले स्थानीय निकाय क्षेत्रों में यह दूरी 220 मीटर निर्धारित की गई है।
ऐसे में आबकारी विभाग के अधिकारियों के लिए जरूरी है कि कपूरथला रोड की कानूनी श्रेणी, संबंधित सड़क पर लागू नियमों और जालंधर कुंज के सामने स्थित शराब के ठेके की वास्तविक दूरी की जांच की जाए। केवल ठेके की सड़क से नजदीकी के आधार पर नियमों के उल्लंघन का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
आबकारी विभाग और ट्रैफिक पुलिस की भूमिका पर सवाल
अब देखना होगा कि आबकारी विभाग और ट्रैफिक पुलिस इस मामले का संज्ञान लेकर मौके का निरीक्षण करते हैं या नहीं। साथ ही यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि ठेके को जारी लाइसेंस और निर्धारित स्थान से संबंधित सभी शर्तों का पालन किया जा रहा है या नहीं।
बड़ा सवाल: आम जनता की सड़क सुरक्षा अधिक महत्वपूर्ण है या सड़क किनारे शराब के ठेके का कारोबार?
प्रशासन को किसी संभावित सड़क हादसे का इंतजार करने के बजाय मामले की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई करनी चाहिए।