बारिश में सड़क निर्माण पर बवाल: पूर्व विधायक राजिंदर बेरी ने उठाए सवाल, काम रुकवाने की मांग
जालंधर के जीटीबी नगर क्षेत्र में बारिश के दौरान सड़क निर्माण का मामला सामने आने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। जालंधर सेंट्रल से पूर्व कांग्रेस विधायक Rajinder Beri ने इस संबंध में एक वीडियो सोशल मीडिया पर साझा कर नगर निगम और पंजाब सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
राजिंदर बेरी ने आरोप लगाया कि बारिश के बीच सड़क निर्माण कराया जा रहा है, जिससे सड़क की गुणवत्ता प्रभावित होगी और सरकारी धन की बर्बादी होगी। उन्होंने कहा कि बरसात के दौरान डाली गई तारकोल (बिटुमिन) लंबे समय तक टिक नहीं सकती, ऐसे में यह कार्य तकनीकी मानकों के अनुरूप नहीं माना जा सकता।
नगर निगम से काम रुकवाने की अपील
बेरी ने नगर निगम के अधिकारियों और कमिश्नर से मामले का संज्ञान लेने की अपील करते हुए कहा कि किसी अधिकारी को मौके पर भेजकर सड़क निर्माण का कार्य तत्काल रुकवाया जाए। उन्होंने कहा कि मौसम साफ होने और धूप निकलने के बाद सड़क निर्माण करवाया जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि सड़क निर्माण पर खर्च होने वाला धन जनता के टैक्स का पैसा है और बारिश में काम करवाने से नगर निगम को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
अग्रवाल ढाबे के पास बन रही थी सड़क
जानकारी के अनुसार, यह सड़क जीटीबी नगर में अग्रवाल ढाबे के पास बनाई जा रही थी। राजिंदर बेरी ने बताया कि शनिवार दोपहर करीब डेढ़ बजे जब वह वहां से गुजरे तो उन्होंने देखा कि बारिश के बावजूद सड़क निर्माण कार्य जारी था।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि पंजाब सरकार ने विकास का एक नया मॉडल पेश किया है, जिसमें बारिश के दौरान सड़कें बनाई जा रही हैं। वीडियो साझा करने के बाद सड़क निर्माण कार्य रोक दिए जाने की भी जानकारी सामने आई है।
सोशल मीडिया पर भी हुई प्रतिक्रिया
इस वीडियो के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने भी प्रतिक्रिया दी। अमेरिका में रह रहे जालंधर के एक व्यक्ति ने टिप्पणी करते हुए कहा कि संबंधित ठेकेदार को आधुनिक तकनीक और मौसम की जानकारी का उपयोग करना चाहिए।
यूजर ने व्यंग्यात्मक अंदाज में लिखा कि यदि जरूरत हो तो वह ठेकेदार को मोबाइल फोन भेज सकता है, ताकि वह मौसम और तापमान की जानकारी देखकर उचित समय पर सड़क निर्माण कर सके और जनता के पैसे की बर्बादी से बचा जा सके।
बारिश के दौरान सड़क निर्माण को लेकर उठे इस विवाद ने एक बार फिर सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।