• Sunday, 26 April 2026
Logo Logo
Advertisement
गांवों में नुक्कड़ मीटिंगें; गन्ना किसानों को गन्ने की फसल में खादों का संतुलित उपयोग करने के लिए जागरूक किया

26 Apr 2026 | 7 Views

गांवों में नुक्कड़ मीटिंगें; गन्ना किसानों को गन्ने की फसल में खादों का संतुलित उपयोग करने के लिए जागरूक किया

जालंधर, 25 अप्रैल: कृषि और किसान भलाई विभाग के गन्ना सेक्शन जालंधर द्वारा गन्ना कमिश्नर पंजाब डा. अमरीक सिंह के नेतृत्व में गन्ने की फसल में खादों के संतुलित उपयोग के संबंध में गन्ना किसानों को जागरूक करने के लिए एक विशेष अभियान चलाया गया है।

 

 

 

इसके तहत ए.बी. खंड मिल दसूहा (जिला होशियारपुर), सहकारी खंड मिल भोगपुर और नकोदर के गन्ना क्षेत्र के गांवों में एक विशेष मुहिम शुरू करते हुए विभिन्न गांवों में नुक्कड़ बैठकों से गन्ना किसानों को गन्ने की फसल में खादों का संतुलित उपयोग करने के लिए प्रेरित किया गया।

 

 

 

प्रोजेक्ट अधिकारी (गन्ना) जालंधर डा. मनधीर सिंह और सहायक गन्ना विकास अधिकारी जालंधर डा. गुरचरण सिंह ने बताया कि गन्ने की फसल लंबी अवधि की फसल होने के कारण इसे आम फसलों जैसे गेहूं, धान, मक्की आदि की तुलना में अधिक मात्रा में पोषक तत्वों की जरूरत पड़ती है। लेकिन गन्ना किसान सिफारिश से ज्यादा खादों का इस्तेमाल करते हैं, खासकर यूरिया खाद का अधिक उपयोग करने से कई तरह की समस्याएं बढ़ रही हैं।

 

 

 

उन्होंने बताया कि ज्यादा यूरिया खाद के उपयोग से गन्ने की फसल ज्यादा गिर जाती है, कीट-मकोड़ों का हमला बढ़ जाता है और चीनी की रिकवरी पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है। इसलिए खादों का संतुलित उपयोग करना चाहिए।

 

 

 

उन्होंने कहा कि वसंत ऋतु के गन्ने की बुवाई लगभग समाप्त हो चुकी है। शरद ऋतु में बोए गए गन्ने की फसल के लिए प्रति एकड़ 195 किलो यूरिया खाद तीन बराबर किस्तों में डालने की सिफारिश की जाती है। इसके अनुसार पहली किश्त बुवाई के समय, दूसरी किश्त मार्च महीने के अंत में तीसरी किश्त अप्रैल के आखिरी हफ्ते में सिफारिश की जाती है।

 

 

 

उन्होंने बताया कि यूरिया खाद को छिटकाव की बजाय पौधों की लाइनों के साथ-साथ केर करके डालें तो चीनी की रिकवरी और पैदावार ज्यादा मिलती है। अगर मिट्टी परीक्षण के आधार पर फॉस्फोरस वाली खाद डालनी हो तो फरवरी में जुताई के समय कतारों के पास डाली जाए।

 

 

 

उन्होंने बताया कि वसंत ऋतु के गन्ने की बीजड़ फसल के लिए 130 किलो और मूढ़ी फसल के लिए 195 किलो यूरिया खाद प्रति एकड़ उपयोग करने की सिफारिश है।

 

 

 

इसके अलावा फॉस्फेटिक और पोटाश खादों का उपयोग मिट्टी परीक्षण के आधार पर करना चाहिए। अगर मिट्टी परीक्षण रिपोर्ट के अनुसार फॉस्फोरस तत्व की कमी हो तो 75 किलो सिंगल सुपरफॉस्फेट खाद प्रति एकड़ डालनी चाहिए।

 

 

 

उन्होंने आगे बताया कि सिफारिशों के अनुसार वसंत ऋतु की बीजड़ फसल के उगने के बाद पहले पानी से पहले पहली किश्त 65 किलो यूरिया फसल की लाइनों के साथ-साथ डालनी चाहिए और बाकी 65 किलो यूरिया मई-जून में डाल देनी चाहिए।

 

 

 

इसी तरह मूढ़ी फसल को 195 किलो यूरिया प्रति एकड़ को तीन बराबर किस्तों में डालना चाहिए

 

- पहली 65 किलो जुताई के समय

 

- दूसरी अप्रैल में

 

- तीसरी किस्त मई में डाल देनी चाहिए।

 

 

 

अगर आलू की फसल के बाद गन्ने की बुवाई की गई हो तो यूरिया की मात्रा प्रति एकड़ 45 किलो कम कर देनी चाहिए।

 

 

 

उन्होंने कहा कि ज्यादा यूरिया खाद के उपयोग से हवा और पानी भी प्रदूषित होता है। यूरिया से अतिरिक्त नाइट्रोजन जमीन के नीचे के पानी में जाकर पानी को प्रदूषित करता है।

 

 

 

इस अभियान का उद्देश्य गन्ना किसानों को सही और संतुलित खाद प्रबंधन के बारे में जागरूक करना है ताकि बेहतर पैदावार, अच्छी चीनी रिकवरी और पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित हो सके।

Published on: 26 Apr 2026

Global Admin
📣 Share this post

Latest News