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पंजाब आबकारी नीति 2026-27: 71% शराब ठेके हुए रिन्यू, बाकी के लिए सरकार लगाएगी टेंडर

16 Mar 2026 | 37 Views

पंजाब आबकारी नीति 2026-27: 71% शराब ठेके हुए रिन्यू, बाकी के लिए सरकार लगाएगी टेंडर

Government of Punjab की वर्ष 2026-27 की नई आबकारी नीति के तहत शराब ठेकेदारों को इस बार अपने ठेकों के समूहों को लगभग 6–7 प्रतिशत राजस्व वृद्धि के साथ नवीनीकृत करने का विकल्प दिया गया था। ताजा जानकारी के मुताबिक राज्य के करीब 71 प्रतिशत ठेकेदारों ने अपने ठेकों का नवीनीकरण करवा लिया है, जबकि शेष 29 प्रतिशत ठेकों के आवंटन के लिए अब सरकार टेंडर प्रक्रिया अपनाएगी

सरकार की योजना है कि इन ठेकों के लिए टेंडर जारी किए जाएं। यदि पुराने या नए ठेकेदार इन टेंडरों में हिस्सा लेते हैं तो उसी आधार पर ठेकों का आवंटन किया जाएगा। अगर पर्याप्त आवेदन नहीं आते, तो सरकार को ठेकों की आरक्षित कीमत कम करके दोबारा टेंडर प्रक्रिया शुरू करनी पड़ सकती है

इन जिलों में हुआ पूरा नवीनीकरण

ठेकेदारों के अनुसार राज्य के कुछ जिलों में सभी शराब ठेकों का नवीनीकरण हो चुका है। इनमें शामिल हैं:

  • बरनाला

  • फरीदकोट

  • फतेहगढ़ साहिब

  • गुरदासपुर

  • मानसा

  • पटियाला

  • तरनतारन

बड़े शहरों में नवीनीकरण का प्रतिशत

अन्य जिलों में नवीनीकरण की स्थिति इस प्रकार बताई जा रही है:

  • लुधियाना – 73%

  • जालंधर – 76%

  • अमृतसर – 75%

जबकि कुछ जिलों में यह प्रतिशत अपेक्षाकृत कम रहा:

  • होशियारपुर – 46%

  • कपूरथला – 43%

  • मोगा – 40%

नुकसान बना नवीनीकरण न करने की वजह

ठेकेदारों का कहना है कि वर्ष 2025-26 के दौरान हुए भारी वित्तीय नुकसान के कारण कई लोगों ने इस बार नवीनीकरण का विकल्प नहीं चुना। उनका आरोप है कि आई.एम.एफ.एल (अंग्रेजी शराब) के ओपन कोटा की नीति से बाजार में शराब की अत्यधिक आपूर्ति हो गई, जिससे खुदरा स्तर पर प्रतिस्पर्धा काफी बढ़ गई और मुनाफा घट गया।

ठेकेदारों के मुताबिक इस व्यवस्था का ज्यादा फायदा शराब फैक्ट्रियों और डिस्टिलरी मालिकों को हुआ, जबकि खुदरा ठेकेदारों को घाटे का सामना करना पड़ा।

सरकार से नीति में बदलाव की मांग

ठेकेदारों ने सरकार से मांग की है कि आबकारी राजस्व को स्थिर बनाए रखने के लिए आई.एम.एफ.एल ओपन कोटा प्रणाली पर सख्त नियंत्रण किया जाए। उनका कहना है कि यदि आपूर्ति और मांग के बीच संतुलन नहीं बनाया गया तो आने वाले समय में कई और ठेकेदार कारोबार से बाहर हो सकते हैं।

उन्होंने सरकार से आबकारी नीति में आवश्यक सुधार करने की मांग की है ताकि खुदरा ठेकेदारों को उचित मुनाफा मिल सके और राज्य के राजस्व पर भी नकारात्मक असर न पड़े।

Published on: 16 Mar 2026

Global Admin
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