मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार की ‘शिक्षा क्रांति’ के तहत शुरू किए गए ‘बिजनेस क्लास’ कार्यक्रम ने पहले ही वर्ष में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। राज्य के उच्च एवं तकनीकी शिक्षण संस्थानों में लागू इस कार्यक्रम के माध्यम से लगभग 95,000 विद्यार्थियों को उद्यमिता और व्यवसाय प्रबंधन का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। इनमें से 25,693 विद्यार्थियों ने अपने स्वयं के व्यवसाय शुरू किए, जबकि छात्र उद्यमों ने पहले ही वर्ष में करीब 90 करोड़ रुपये का कारोबार दर्ज किया।
उच्च शिक्षा एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि पंजाब का ‘बिजनेस क्लास’ कार्यक्रम शिक्षा के उद्देश्य को नई दिशा दे रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि ऐसे युवाओं को तैयार करना है जो नवाचार करें, उद्यम स्थापित करें और रोजगार के अवसर पैदा करें। बैंस ने बताया कि 25,000 से अधिक विद्यार्थियों द्वारा शुरू किए गए स्टार्टअप्स की सफलता यह साबित करती है कि उचित मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर युवा आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
शैक्षणिक सत्र 2025-26 में राज्य की 20 विश्वविद्यालयों, 494 कॉलेजों, 320 आईटीआई और 91 पॉलिटेक्निक सहित कुल 925 संस्थानों में बी.कॉम., बीबीए, बी.टेक. और बी.वोकेशनल के विद्यार्थियों के लिए दो-क्रेडिट का यह अनिवार्य पाठ्यक्रम शुरू किया गया था। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल नौकरी की तलाश तक सीमित रखने के बजाय उन्हें रोजगार सृजक बनाना है।
पारंपरिक शिक्षा प्रणाली से अलग इस पाठ्यक्रम में विद्यार्थियों को व्यावसायिक अवसरों की पहचान, ग्राहक अनुसंधान, बाजार सत्यापन, डिजिटल मार्केटिंग, मूल्य निर्धारण, वित्तीय योजना, संचार कौशल और समस्या समाधान जैसे व्यावहारिक कौशल सिखाए जाते हैं। इसका परिणाम यह रहा कि लगभग 57,000 विद्यार्थी पढ़ाई के दौरान ही वास्तविक व्यावसायिक गतिविधियों से जुड़ गए।
कार्यक्रम के तहत विद्यार्थियों ने ई-कॉमर्स, डिजिटल कंटेंट निर्माण, ग्राफिक डिजाइनिंग, फिटनेस एवं वेलनेस, कृषि आधारित उद्यम, बेकरी एवं फूड सर्विस, ब्यूटी एवं पर्सनल केयर तथा अन्य स्थानीय सेवा क्षेत्रों में अपने व्यवसाय शुरू किए। राज्य के विभिन्न संस्थानों के छात्रों ने उल्लेखनीय सफलता हासिल की है।
गुरु नानक देव विश्वविद्यालय, अमृतसर के छात्र सौरव ने ‘मॉक, इन माचा’ नामक माचा पेय ब्रांड शुरू कर लगभग 90,000 रुपये की कमाई की। वहीं महाराजा रणजीत सिंह पंजाब टेक्निकल यूनिवर्सिटी, बठिंडा के शरणवीर सिंह ने ‘स्किलएक्सस’ नामक डिजिटल करियर गाइडेंस प्लेटफॉर्म विकसित किया, जिसके 2.5 लाख से अधिक उपयोगकर्ता हैं।
संत बाबा भाग सिंह विश्वविद्यालय, जालंधर के पंकज ने ‘जारिया ज्वेलरी’ नाम से ऑनलाइन आर्टिफिशियल ज्वेलरी व्यवसाय शुरू कर 30,000 रुपये की आय अर्जित की। सरकारी आईटीआई, पटियाला के कमलजीत सिंह ने ‘केएमएल मशरूम’ ब्रांड के तहत मशरूम उत्पादन और बिक्री का व्यवसाय शुरू कर लगभग 1.5 लाख रुपये कमाए।
सरकारी आईटीआई (महिला), मोहाली की गगनप्रीत कौर रंगी ने ‘नेल स्टूडियो बाय गगन’ नाम से नेल आर्ट व्यवसाय शुरू कर करीब 55,000 रुपये की कमाई की, जबकि सरकारी आईटीआई, मोहाली के रमनदीप सिंह ने ‘क्वालिटी इलेक्ट्रॉनिक स्टोर’ के माध्यम से ऑनलाइन इलेक्ट्रॉनिक्स कारोबार शुरू किया।
कार्यक्रम की सफलता को देखते हुए राज्य के सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 से ‘बिजनेस क्लास’ को सभी स्नातक पाठ्यक्रमों में लागू करने की सिफारिश की है। अब यह कार्यक्रम केवल बी.कॉम., बीबीए, बी.टेक. और बी.वोकेशनल तक सीमित न रहकर बी.ए., बी.एससी. सहित सभी अंडरग्रेजुएट कोर्सों में लागू किया जाएगा।
सरकार का मानना है कि उद्यमिता आधारित शिक्षा के माध्यम से युवाओं को आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है। ‘बिजनेस क्लास’ कार्यक्रम की सफलता को पंजाब की शिक्षा क्रांति की एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है, जो विद्यार्थियों को नौकरी मांगने वालों के बजाय रोजगार देने वाले उद्यमी बनने की दिशा में प्रेरित कर रही है।