पंजाब कांग्रेस में लंबे समय से चल रही अंदरूनी नाराजगी अब खुलकर सामने आने लगी है। पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं गुरदासपुर से सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा की कार्यशैली पर सार्वजनिक रूप से सवाल उठाए हैं। एक निजी मीडिया चैनल को दिए इंटरव्यू में रंधावा ने संगठन में संवाद और सामूहिक नेतृत्व की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि पार्टी को मजबूत बनाने के लिए सभी नेताओं को मिलकर काम करना होगा।
रंधावा ने कहा कि वह राजा वड़िंग को अपना छोटा भाई और नेता मानते हैं, लेकिन कई मौकों पर सार्वजनिक मंचों पर की गई टिप्पणियों से उन्हें अपमानित महसूस हुआ। उन्होंने दावा किया कि जब राजा वड़िंग को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाया गया था, तब उन्होंने उन्हें बधाई संदेश भेजा था, लेकिन उसका कोई जवाब नहीं मिला। उन्होंने कहा कि संगठन में संवाद की कमी कई बार गलतफहमियों को जन्म देती है।
सांसद रंधावा ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस में किसी प्रकार का विभाजन नहीं है, बल्कि केवल वैचारिक मतभेद हैं। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों में अलग-अलग विचार होना स्वाभाविक है, लेकिन पार्टी हित सर्वोपरि होना चाहिए। उन्होंने नेताओं से व्यक्तिगत अहंकार छोड़कर एकजुट होकर काम करने की अपील की। रंधावा ने उदाहरण देते हुए कहा कि पार्टी को मजबूत करने के लिए उन्होंने स्वयं वरिष्ठ नेता राणा गुरजीत सिंह के साथ पुरानी राजनीतिक दूरियां भुलाकर मुलाकात की थी।
नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा से जुड़े कादियां प्रकरण का उल्लेख करते हुए रंधावा ने नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि यदि स्थानीय सांसद और विधायक भी उस आंदोलन में शामिल होते तो परिस्थितियां अलग हो सकती थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें पूरे कार्यक्रम से दूर रखा गया और इसकी जानकारी तक नहीं दी गई।
प्रताप सिंह बाजवा के भाई फतेह जंग बाजवा के भाजपा में शामिल होने पर भी रंधावा ने दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि राजनीति में बढ़ती कटुता के कारण भाई-भाई अलग हो रहे हैं, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने भावुक अंदाज में कहा कि ऐसे समय में परिवार और रिश्तों को राजनीतिक मतभेदों से ऊपर रखना चाहिए।
पंजाब में भाजपा की संभावनाओं पर टिप्पणी करते हुए रंधावा ने कहा कि राज्य की राजनीति की दिशा अभी भी कांग्रेस और क्षेत्रीय मुद्दों के इर्द-गिर्द घूमती है। उन्होंने दावा किया कि पंजाब में भाजपा की स्थिति मजबूत नहीं है और जनता राज्य से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता देती है। केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू पर भी निशाना साधते हुए उन्होंने भाजपा नेतृत्व के कुछ फैसलों पर सवाल उठाए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पंजाब दौरों का जिक्र करते हुए रंधावा ने कहा कि राज्य को केवल बुनियादी घोषणाओं की नहीं, बल्कि बड़े औद्योगिक निवेश, रेलवे कोच फैक्ट्री जैसे प्रोजेक्ट और किसानों के कृषि ऋण से जुड़ी समस्याओं के समाधान की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि पंजाब के आर्थिक और कृषि क्षेत्र को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार को विशेष पैकेज देने पर विचार करना चाहिए।
रंधावा के इन बयानों को पंजाब कांग्रेस में जारी अंदरूनी असंतोष और नेतृत्व को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आगामी चुनावों से पहले पार्टी नेतृत्व को संगठनात्मक एकजुटता बनाए रखने के लिए इन मुद्दों पर ध्यान देना पड़ सकता है।