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पंजाब में भाजपा-अकाली दल गठबंधन की अटकलें तेज, हरसिमरत कौर बादल के बयान से बढ़ी चर्चाएं

21 Aug 2026 | 22 Views

पंजाब में भाजपा-अकाली दल गठबंधन की अटकलें तेज, हरसिमरत कौर बादल के बयान से बढ़ी चर्चाएं

पंजाब में भाजपा-अकाली दल गठबंधन की अटकलें तेज, हरसिमरत कौर बादल के बयान से बढ़ी चर्चाएं

दिल्ली से विकास कार्यों के लिए ‘पहले जैसे समझौतों’ का किया जिक्र, राजनीतिक गलियारों में शुरू हुई नई चर्चा

पंजाब विधानसभा चुनावों को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के बीच संभावित गठबंधन की चर्चाएं एक बार फिर तेज हो गई हैं। शिअद की वरिष्ठ नेता और बठिंडा से सांसद हरसिमरत कौर बादल के हालिया बयान के बाद दोनों दलों के दोबारा साथ आने की संभावनाओं को लेकर राजनीतिक हलकों में नई अटकलें शुरू हो गई हैं।

संगरूर में शिरोमणि अकाली दल के पूर्व अध्यक्ष संत हरचंद सिंह लोंगोवाल की बरसी के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में हरसिमरत कौर बादल ने लोगों को संबोधित करते हुए पंजाब के विकास और केंद्र सरकार के सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि प्रदेश के विकास के लिए केंद्र और राज्य के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है।

उन्होंने कहा कि लोगों ने स्किल्ड यूनिवर्सिटी की मांग रखी है, जो कोई बड़ा काम नहीं है। यदि पहले की तरह ऐसे समझौते बनें जिनके माध्यम से दिल्ली से विकास परियोजनाएं और संसाधन पंजाब तक पहुंच सकें, तो राज्य में बड़े स्तर पर विकास कार्यों की शुरुआत की जा सकती है। उनके इस बयान को भाजपा और अकाली दल के बीच संभावित राजनीतिक समीकरणों के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

हालांकि हरसिमरत कौर बादल ने गठबंधन को लेकर कोई सीधी घोषणा नहीं की। जब उनसे भाजपा और शिअद के बीच संभावित समझौते के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि इस विषय पर घोषणा करना उनका कार्य नहीं है और समय आने पर सारी बातें स्वयं स्पष्ट हो जाएंगी। उनके इस जवाब ने राजनीतिक चर्चाओं को और अधिक हवा दे दी है।

अपने संबोधन में उन्होंने यह भी कहा कि इतिहास इस बात का गवाह है कि जब भी शिरोमणि अकाली दल ने पंजाब में शांति, भाईचारे और सामाजिक सौहार्द के लिए काम किया, तब उसे कमजोर करने के प्रयास किए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ बाहरी ताकतों ने छोटे-छोटे समूहों को बढ़ावा देकर अकाली दल को कमजोर करने की कोशिश की, क्योंकि उनका उद्देश्य पंजाब के हितों की रक्षा करना नहीं बल्कि अपने राजनीतिक हित साधना था।

उल्लेखनीय है कि हाल ही में शिअद अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद भाजपा और अकाली दल के रिश्तों को लेकर चर्चाएं तेज हुई थीं। इसके बाद अकाली दल ने महिला आरक्षण को शीघ्र लागू करने की मांग का समर्थन किया। साथ ही लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने से संबंधित केंद्र सरकार के प्रस्ताव के प्रति भी सकारात्मक रुख दिखाया गया।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए पंजाब की राजनीति में नए समीकरण बनने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि भाजपा और शिरोमणि अकाली दल की ओर से अब तक किसी औपचारिक गठबंधन की घोषणा नहीं की गई है, लेकिन हालिया घटनाक्रमों ने दोनों दलों के बीच संभावित सहयोग को लेकर चर्चाओं को जरूर तेज कर दिया है।

Published on: 21 Aug 2026

Global Admin
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