पंजाब देश में सबसे अधिक वेतनमान देने वाले राज्यों में शामिल, कई श्रेणियों में केंद्र से भी आगे: हरपाल सिंह चीमा
अकाली दल-भाजपा और कांग्रेस सरकारें वेतन आयोग के 14,191 करोड़ रुपये के बकाये का बोझ छोड़ गईं; ‘आप’ सरकार 6,000 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान कर चुकी
चंडीगढ़, 4 अगस्त 2026।
पंजाब के वित्त मंत्री एडवोकेट हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि पंजाब देश में सरकारी कर्मचारियों को सबसे अधिक वेतनमान देने वाले राज्यों में शामिल है और कई श्रेणियों में राज्य सरकार के वेतनमान केंद्र सरकार से भी अधिक हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती शिरोमणि अकाली दल-भाजपा और कांग्रेस सरकारों की नीतियों के कारण पंजाब को वेतन आयोग के बकायों के रूप में 14,191 करोड़ रुपये की वित्तीय देनदारी विरासत में मिली।
पंजाब भवन में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि आम आदमी पार्टी के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार हाईकोर्ट द्वारा स्वीकृत निपटान योजना के तहत कर्मचारियों को 6,000 करोड़ रुपये से अधिक की बकाया राशि का भुगतान कर चुकी है। उन्होंने कहा कि सरकार सभी संवैधानिक और कानूनी रूप से वैध बकायों का भुगतान करने के लिए प्रतिबद्ध है।
चीमा ने कहा कि हाईकोर्ट के हालिया फैसले का विस्तृत कानूनी अध्ययन किया जा रहा है और उपलब्ध कानूनी विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार की कानूनी टीम न्यायिक नज़ीरों की समीक्षा कर रही है तथा विधि विशेषज्ञों से परामर्श के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। इसमें सर्वोच्च न्यायालय में अपील दायर करने की संभावना भी शामिल है।
वित्त मंत्री ने कहा कि कर्मचारियों के वेतन आयोग की रिपोर्ट वर्ष 2016 में तत्कालीन अकाली दल-भाजपा सरकार के कार्यकाल के दौरान तैयार की गई थी, लेकिन इसे कई वर्षों तक लागू नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि यह रिपोर्ट जुलाई 2021 में लागू हुई, जिसके कारण 1 जनवरी 2016 से जुलाई 2021 तक के महंगाई भत्ते यानी डीए के बकाये को स्थगित कर दिया गया।
उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया के परिणामस्वरूप राज्य पर 14,191 करोड़ रुपये की देनदारी बन गई। वित्त मंत्री के अनुसार, तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने की प्रक्रिया शुरू की, लेकिन बकाया राशि का भुगतान किए बिना अपना कार्यकाल पूरा कर लिया, जिससे इसका पूरा वित्तीय बोझ वर्तमान सरकार को उठाना पड़ा।
‘आप’ सरकार द्वारा किए गए भुगतान का उल्लेख करते हुए चीमा ने कहा कि विभिन्न कर्मचारी संगठनों और कर्मचारियों द्वारा हाईकोर्ट का रुख किए जाने के बाद पंजाब सरकार ने एक व्यवस्थित निपटान योजना तैयार की थी। इस योजना को हाईकोर्ट ने स्वीकार किया था।
उन्होंने कहा, “14,191 करोड़ रुपये की कुल देनदारी में से आम आदमी पार्टी की सरकार कर्मचारियों को 6,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि पहले ही जारी कर चुकी है। अदालत द्वारा स्वीकार की गई निपटान योजना को चरणबद्ध और सुचारु रूप से लागू किया जा रहा है।”
वर्तमान डीए के वितरण से संबंधित हाईकोर्ट के ताजा फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार फैसले के कानूनी और संवैधानिक पहलुओं का अध्ययन कर रही है। उन्होंने कहा कि एकल पीठ की व्याख्या में कुछ संवैधानिक मानदंडों और पूर्व न्यायिक निर्णयों से संबंधित मुद्दों की समीक्षा की आवश्यकता हो सकती है।
वर्ष 2005 में महाराष्ट्र राज्य से जुड़े संविधान पीठ के फैसले का उल्लेख करते हुए चीमा ने कहा कि पंजाब इस समय देश में उच्च वेतनमान देने वाले राज्यों में शामिल है और कई सरकारी पदों पर राज्य का वेतन ढांचा केंद्र सरकार की तुलना में अधिक है।
विभिन्न पदों के लिए पंजाब और केंद्र सरकार के वेतनमानों की तुलना प्रस्तुत करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का कानूनी पक्ष यह रहा है कि जब किसी राज्य का मूल वेतनमान पहले से ही अधिक हो, तो एक ही समय में सबसे अधिक मूल वेतनमान और केंद्र सरकार की उच्चतम डीए दर—दोनों को समान रूप से लागू करना वित्तीय और कानूनी दृष्टि से जटिल हो सकता है।
उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने भी नए भर्ती किए गए कर्मचारियों को केंद्रीय वेतन आयोग के दिशा-निर्देशों के तहत शामिल करने का निर्णय लिया था।
कर्मचारियों के प्रति पंजाब सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए चीमा ने कहा कि सरकार सभी संवैधानिक और कानूनी रूप से वैध वित्तीय देनदारियों का भुगतान करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा, “हमारी कानूनी टीम हाईकोर्ट के ताजा फैसले का विस्तृत अध्ययन कर रही है। संबंधित न्यायिक नज़ीरों की समीक्षा की जा रही है और विधि विशेषज्ञों से परामर्श किया जा रहा है। सरकार उचित कानूनी रास्ता तय करेगी, जिसमें आवश्यकता पड़ने पर सर्वोच्च न्यायालय में अपील दायर करने का विकल्प भी शामिल है।”
प्रेस वार्ता के अंत में वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि पूर्ववर्ती अकाली दल-भाजपा और कांग्रेस सरकारों से भारी वित्तीय देनदारियां विरासत में मिलने के बावजूद पंजाब सरकार सभी बकाया वित्तीय दायित्वों का योजनाबद्ध, पारदर्शी और जिम्मेदार तरीके से समाधान करने के लिए प्रतिबद्ध है।