पटियाला जिले के गांव सुनियारहेड़ी में सनौर रजवाहा टूटने से लगभग 100 एकड़ में लगी धान की फसल जलमग्न हो गई है। किसानों ने आरोप लगाया है कि नहरी विभाग को बार-बार सूचित करने के बावजूद समय पर कार्रवाई नहीं की गई, जिसके कारण उन्हें भारी आर्थिक नुकसान हुआ है।
किसानों के मुताबिक, रजवाहा टूटने के बाद बड़ी मात्रा में पानी खेतों में भर गया। सूचना मिलने पर नहरी विभाग के केवल 2 कर्मचारी (बेलदार) मौके पर पहुंचे। उन्होंने मिट्टी से भरी बोरियों की मदद से पानी रोकने का प्रयास किया, लेकिन पानी के तेज बहाव के कारण यह कोशिश नाकाम रही। किसानों का यह भी कहना है कि घटना के 24 घंटे से अधिक समय बीत जाने के बाद भी रजवाहे की स्थायी मरम्मत नहीं की गई है।
ग्रामीणों ने जानकारी दी कि यह रजवाहा पहले भी दो बार टूट चुका है। इसके बावजूद विभाग ने इसकी स्थायी मरम्मत पर ध्यान नहीं दिया। उनका मानना है कि यदि समय रहते उचित कदम उठाए जाते तो इस बड़े नुकसान से बचा जा सकता था।
दूसरी ओर, नहरी विभाग के अधिकारियों ने बताया कि उन्होंने एक बार पानी बंद करवा दिया था। हालांकि, उनका दावा है कि रात के समय किसी अज्ञात व्यक्ति ने रजवाहे के फट्टे दोबारा खोल दिए, जिससे पानी खेतों में बह गया। किसानों ने विभाग के इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि विभाग की जानकारी के बिना ऐसा होना संभव नहीं है।
प्रभावित किसानों ने इस मामले की उच्चस्तरीय जांच, जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और खराब हुई धान की फसल के लिए उचित मुआवजे की मांग की है।