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सिडनी में एच5एन1 बर्ड फ्लू का पहला मामला, समुद्री पक्षी में मिला खतरनाक वायरस

04 Sep 2026 | 95 Views

सिडनी में एच5एन1 बर्ड फ्लू का पहला मामला, समुद्री पक्षी में मिला खतरनाक वायरस

सिडनी में एच5एन1 बर्ड फ्लू का पहला मामला, समुद्री पक्षी में मिला खतरनाक वायरस

सिडनी, 4 सितंबर। ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में खतरनाक एच5एन1 एवियन इन्फ्लूएंजा का पहला कन्फर्म मामला सामने आया है। न्यू साउथ वेल्स की कृषि मंत्री तारा मोरियार्टी ने बताया कि अगस्त के अंतिम दिनों में सिडनी के नॉर्दर्न बीच क्षेत्र में मिले एक ग्रेटर क्रेस्टेड टर्न नामक समुद्री पक्षी की जांच के दौरान एच5एन1 वायरस की पुष्टि हुई।

जून में इस वायरस के ऑस्ट्रेलिया की मुख्य भूमि तक पहुंचने के बाद सिडनी में यह पहला पुष्ट मामला है। घटना के बाद स्थानीय प्रशासन ने जंगली पक्षियों और पालतू पक्षियों के संपर्क को लेकर लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।

पालतू पक्षियों और कुत्तों को लेकर सावधानी

कृषि मंत्री ने सिडनी के उन लोगों से विशेष सावधानी बरतने को कहा है, जिनके घरों में मुर्गियां या अन्य पालतू पक्षी हैं। उन्होंने लोगों को जंगली पक्षियों के संपर्क से अपने पालतू पक्षियों को दूर रखने की सलाह दी।

कुत्ते पालने वाले लोगों से भी कहा गया है कि वे अपने पालतू कुत्तों को मृत पक्षियों या अन्य जानवरों के शव खाने से रोकें और उन्हें जंगली पक्षियों का पीछा करने से बचाएं।

नॉर्दर्न बीचेस काउंसिल की मेयर सू हीन्स ने आशंका जताई कि यह क्षेत्र में सामने आने वाले कई मामलों में पहला मामला हो सकता है। उन्होंने कहा कि इस वायरस के संभावित गंभीर प्रभावों से निपटने के लिए इलाके को तैयार रहना चाहिए। एच5एन1 के कारण दुनिया के कई हिस्सों में बड़ी संख्या में जंगली और पालतू पक्षियों की मौत हो चुकी है।

ऑस्ट्रेलिया में 468 मामलों की पुष्टि

सिन्हुआ की रिपोर्ट के मुताबिक, संघीय सरकार के ताजा आंकड़ों में बुधवार तक पूरे ऑस्ट्रेलिया में एच5एन1 बर्ड फ्लू के 468 पुष्ट मामले सामने आ चुके थे। इनमें से 20 मामले न्यू साउथ वेल्स में दर्ज किए गए हैं।

हालांकि, एनएसडब्ल्यू सरकार के अनुसार राज्य के कमर्शियल पोल्ट्री झुंडों, कैद में रखे गए पक्षियों या मवेशियों में फिलहाल एच5एन1 संक्रमण का कोई मामला सामने नहीं आया है।

इंसानों के लिए भी खतरा

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार एच5एन1 एवियन इन्फ्लूएंजा वायरस का एक प्रकार है, जो पक्षियों में तेजी से फैलने वाली बीमारी पैदा करता है। इसके संक्रमण के मामले इंसानों समेत विभिन्न स्तनधारी जीवों में भी सामने आ चुके हैं।

इंसानों में संक्रमण हल्के से लेकर गंभीर बीमारी तक पैदा कर सकता है और कुछ मामलों में यह जानलेवा भी हो सकता है। इसके प्रमुख लक्षण सांस से संबंधित होते हैं, लेकिन आंखों में संक्रमण यानी कंजंक्टिवाइटिस तथा अन्य लक्षण भी सामने आ सकते हैं। कुछ मामलों में संक्रमित जानवरों या उनके वातावरण के संपर्क में आए लोगों में वायरस पाया गया है, लेकिन उनमें कोई स्पष्ट लक्षण नहीं थे।

1996 से फैल रहा एच5एन1 का वंश

एच5एन1 एवियन इन्फ्लूएंजा वायरस का गूज/ग्वांगडोंग-लीनिएज पहली बार वर्ष 1996 में सामने आया था। वर्ष 2020 के बाद इसके एक वैरिएंट के कारण दुनिया के कई हिस्सों में जंगली पक्षियों और पोल्ट्री में बड़े पैमाने पर संक्रमण और मौतें हुईं।

यह वायरस पहले अफ्रीका, एशिया और यूरोप में फैला और बाद में उत्तरी अमेरिका तथा मध्य और दक्षिण अमेरिका तक पहुंच गया। वर्ष 2021 से 2022 के बीच यूरोप और उत्तरी अमेरिका में एवियन इन्फ्लूएंजा का बड़ा और लंबे समय तक चलने वाला प्रकोप देखा गया।

स्तनधारी जीवों में भी बढ़ा संक्रमण

वर्ष 2022 के बाद से एच5एन1 समेत इन्फ्लूएंजा ए(एच5) वायरस से स्तनधारी जीवों में गंभीर और कई बार जानलेवा संक्रमण के मामले भी बढ़े हैं। विशेषज्ञों के अनुसार जमीन और समुद्र दोनों जगह रहने वाले कई स्तनधारी जीव इससे प्रभावित हुए हैं।

फर के लिए पाले जाने वाले जानवरों, सील और सी लायन के अलावा लोमड़ी, भालू, ऊदबिलाव, रैकून, बिल्ली, कुत्ते, गाय, बकरी और कई अन्य जंगली व घरेलू जानवरों में भी एच5एन1 संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है। सिडनी में नया मामला सामने आने के बाद स्थानीय प्रशासन ने जंगली पक्षियों और पालतू जानवरों के संपर्क को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है।

Published on: 04 Sep 2026

Global Admin
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