🏛️ न्यायालय: भारत का सर्वोच्च न्यायालय
👨⚖️ पीठ: माननीय मुख्य न्यायाधीश एवं माननीय न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची तथा माननीय न्यायमूर्ति एन. वी. अंजारिया
📂 प्रकरण: In Re: Victims of Digital Arrest Related to Forged Documents
📄 मामला: Suo Motu W.P. (Criminal) No. 3 of 2025
📅 आदेश दिनांक: 09 फरवरी 2026
देशभर में बढ़ते "डिजिटल अरेस्ट" साइबर धोखाधड़ी के मामलों को गंभीरता से लेते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने स्वतः संज्ञान लिया। केंद्र सरकार, गृह मंत्रालय, RBI, दूरसंचार विभाग (DoT), MeitY तथा अन्य एजेंसियों ने न्यायालय के समक्ष विस्तृत स्थिति रिपोर्ट एवं कार्ययोजना प्रस्तुत की। न्यायालय ने साइबर धोखाधड़ी से पीड़ितों के धन की शीघ्र वापसी, शिकायत निवारण तथा विभिन्न एजेंसियों के बीच प्रभावी समन्वय सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया।
🏛️ सर्वोच्च न्यायालय के प्रमुख निर्देश
1. न्यायालय ने NCRP–CFCFRMS Standard Operating Procedure (SOP) को पूरे देश में औपचारिक रूप से लागू करने तथा सभी संबंधित एजेंसियों द्वारा उसका समान रूप से पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
2. सभी उच्च न्यायालयों को निर्देश दिया गया कि वे अपने अधिकार क्षेत्र के अधीन सभी न्यायिक प्राधिकरणों द्वारा उक्त SOP का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करें।
3. न्यायालय ने कहा कि ₹10 करोड़ या उससे अधिक की डिजिटल अरेस्ट धोखाधड़ी के मामलों की CBI द्वारा शीघ्र जांच की जाए तथा आवश्यक स्वीकृतियाँ समयबद्ध रूप से प्रदान की जाएँ।
4. RBI, गृह मंत्रालय, DoT एवं MeitY को आपसी समन्वय बढ़ाकर बैंक खातों पर समयबद्ध कार्रवाई, संदिग्ध लेन-देन पर नियंत्रण, शिकायतों के त्वरित निस्तारण तथा पीड़ितों के धन की शीघ्र बहाली के लिए प्रभावी व्यवस्था विकसित करने का निर्देश दिया गया।
5. न्यायालय ने पीड़ितों के हितों की सुरक्षा के लिए एक समान राष्ट्रीय प्रक्रिया, प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र तथा आवश्यक तकनीकी एवं प्रशासनिक सुधारों को शीघ्र लागू करने पर बल दिया।
⚖️ निर्णय
सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार एवं संबंधित एजेंसियों को उपर्युक्त निर्देशों का समयबद्ध पालन करने का आदेश दिया तथा मामले की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश देते हुए सुनवाई आगे के लिए निर्धारित की।
📌 Ratio Decidendi
✅ डिजिटल अरेस्ट एवं साइबर वित्तीय धोखाधड़ी से निपटने हेतु पूरे देश में एक समान SOP आवश्यक है।
✅ पीड़ितों के धन की त्वरित बहाली एवं प्रभावी शिकायत निवारण राज्य का महत्वपूर्ण दायित्व है।
✅ विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाकर साइबर अपराधों की जांच और रोकथाम को अधिक प्रभावी बनाया जाना चाहिए।
✅ बड़े साइबर धोखाधड़ी मामलों में समयबद्ध एवं प्रभावी जांच सुनिश्चित की जानी चाहिए।