खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब आम लोगों की रसोई तक पहुंचने लगा है। स्ट्रेट ऑफ हार्मुज़ को लेकर अनिश्चितता के कारण गैस सप्लाई बाधित हो गई है, जिससे घरेलू और कमर्शियल उपभोक्ताओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
बताया जा रहा है कि पिछले करीब सवा महीने से गैस की नियमित आपूर्ति प्रभावित है। हालात ऐसे हैं कि लोग अब वैकल्पिक इंतजाम करने को मजबूर हो गए हैं। अमेरिका द्वारा समुद्र में युद्धपोत तैनात करने और ईरान से आने वाले जहाजों को चेतावनी देने के बाद स्थिति और अधिक गंभीर हो गई है।
इधर, तेल कंपनियों की ओर से गैस एजेंसियों को पर्याप्त सिलेंडर उपलब्ध नहीं कराए जा रहे। ऑनलाइन बुकिंग सिस्टम भी फेल होता नजर आ रहा है। उपभोक्ताओं का कहना है कि बुकिंग के बावजूद 10 से 15 दिनों तक गैस सिलेंडर की डिलीवरी नहीं हो रही, जिससे उन्हें बार-बार एजेंसियों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
कई जगहों पर उपभोक्ताओं में रोष देखने को मिल रहा है, वहीं प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। गैस एजेंसियों को मिलने वाले सिलेंडरों का ऑडिट अब तक नहीं हो पाया है। यदि समय पर ऑडिट होता, तो यह स्पष्ट हो सकता था कि कितने सिलेंडर उपभोक्ताओं तक पहुंचे और कितने ब्लैक मार्केट में बेचे गए।
⚠️ छोटे कारोबार पर बड़ा असर
गैस संकट का असर छोटे उद्योगों और ढाबा संचालकों पर भी साफ दिख रहा है। गैस की कमी के कारण उनके कामकाज में गिरावट आई है। कई व्यापारियों का कहना है कि यदि हालात जल्द नहीं सुधरे, तो उन्हें अपना काम अस्थायी रूप से बंद करना पड़ सकता है, जिससे रोजगार पर भी असर पड़ेगा।
📢 क्या है मांग?
उपभोक्ताओं ने सरकार से मांग की है कि गैस सप्लाई को सुचारू बनाने के लिए वैकल्पिक स्रोतों की व्यवस्था की जाए, स्थानीय स्तर पर स्टॉक बढ़ाया जाए और ब्लैक मार्केटिंग पर सख्त कार्रवाई की जाए। विशेषज्ञों का मानना है कि पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए गैस वितरण प्रणाली का सख्ती से ऑडिट बेहद जरूरी है।