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ई-20 पेट्रोल से वाहनों के नुकसान का मुद्दा पंजाब विधानसभा में गूंजा

05 Aug 2026 | 18 Views

ई-20 पेट्रोल से वाहनों के नुकसान का मुद्दा पंजाब विधानसभा में गूंजा

अमेरिकी दबाव में प्रधानमंत्री मोदी देश के 30 करोड़ वाहनों को स्क्रैप में बदलने पर तुले हैं: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान

 

केंद्र ने संसद में माना कि ई-20 से माइलेज घटती है; उपभोक्ताओं को शुद्ध पेट्रोल और ई-20 में से चुनाव का अधिकार मिले: मुख्यमंत्री

 

चंडीगढ़, 4 अगस्त 2026।

 

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने पंजाब विधानसभा में ई-20 इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल का मुद्दा उठाते हुए केंद्र सरकार पर इसे वाहन मालिकों पर जबरन थोपने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने संसद में ई-20 पेट्रोल से वाहनों की माइलेज घटने की बात स्वीकार की है, इसके बावजूद इसे लागू किया जा रहा है, जिससे आम वाहन मालिकों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ रहा है।

 

मुख्यमंत्री ने सवाल उठाया कि ई-20 पेट्रोल को लागू करने में इतनी जल्दबाजी क्यों दिखाई गई। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदम अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते के हितों को ध्यान में रखकर उठाया गया है। उन्होंने दावा किया कि इस समझौते के तहत भारत अगले पांच वर्षों में अमेरिका से लगभग 20 अरब डॉलर का इथेनॉल आयात करेगा।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि उपभोक्ताओं को अपनी पसंद का ईंधन चुनने के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। उन्होंने मांग की कि देश के सभी फ्यूल स्टेशनों पर शुद्ध पेट्रोल और ई-20 दोनों उपलब्ध करवाए जाएं तथा ई-20 की कीमत शुद्ध पेट्रोल से कम रखी जाए।

 

उन्होंने कहा कि पंजाब विधानसभा ने आम लोगों के हितों की रक्षा के लिए इस मुद्दे पर एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजने का निर्णय लिया है।

 

सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट साझा करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पंजाब विधानसभा सत्र के दौरान मैंने उपभोक्ताओं पर ई-20 इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल थोपे जाने और इससे लोगों के वाहनों को हो रहे कथित नुकसान का गंभीर मुद्दा उठाया। यह तेल केंद्र सरकार द्वारा बिना किसी वैज्ञानिक अध्ययन के थोपा गया है।”

 

मुख्यमंत्री ने एक सर्वेक्षण का हवाला देते हुए दावा किया कि ई-20 के उपयोग से 67 प्रतिशत वाहनों की माइलेज में कमी आई, जबकि 45 प्रतिशत वाहनों के इंजन प्रभावित हुए। उन्होंने कहा कि इससे आम लोगों पर सीधे तौर पर आर्थिक बोझ पड़ रहा है।

 

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने संसद में स्वीकार किया है कि ई-20 पेट्रोल से वाहनों की माइलेज कम हो सकती है। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि यह नीति अमेरिका के साथ व्यापार समझौते के हितों को पूरा करने और बड़ी कॉरपोरेट कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए लागू की जा रही है।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब विधानसभा ने इस मुद्दे पर प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से मांग की है कि पेट्रोल पंपों पर उपभोक्ताओं को शुद्ध पेट्रोल और ई-20 में से चुनाव करने का अधिकार दिया जाए तथा ई-20 की कीमत में तुरंत कमी की जाए।

 

विधानसभा में बहस का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ई-20 इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल देश के प्रत्येक वाहन मालिक के लिए गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसे बिना पर्याप्त वैज्ञानिक अध्ययन, उचित शोध और व्यापक सलाह-मशवरे के लागू किया गया है।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने यह साबित करने के लिए कोई स्वतंत्र अध्ययन सार्वजनिक नहीं किया कि ई-20 पेट्रोल सभी पुराने वाहनों और इंजनों के लिए पूरी तरह सुरक्षित है। उन्होंने सवाल उठाया कि इस संबंध में किसी प्रमुख इंजीनियरिंग संस्थान या आईआईटी से प्रमाणन क्यों नहीं लिया गया।

 

उन्होंने कहा कि ई-10 पेट्रोल के लिए डिजाइन किए गए कई वाहनों को अब ई-20 के उपयोग की स्थिति में लाया गया है। मुख्यमंत्री ने 45,000 से अधिक वाहनों के एक सर्वेक्षण का हवाला देते हुए दावा किया कि 67 प्रतिशत वाहन मालिकों ने माइलेज में कमी की शिकायत की, जबकि 45 प्रतिशत मामलों में इंजन से संबंधित समस्याएं सामने आईं।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि आम लोग वर्षों की बचत और बैंक ऋण या किस्तों पर वाहन खरीदते हैं। ऐसे में ईंधन नीति के कारण यदि उन्हें अतिरिक्त मरम्मत खर्च उठाना पड़ता है तो यह उनके लिए गंभीर आर्थिक समस्या बन सकती है।

 

उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी ई-20 पेट्रोल का मुद्दा उठाया है और दो लाख से अधिक हस्ताक्षरों वाली एक जन-याचिका तैयार की गई है, जिसे प्रधानमंत्री को सौंपने की योजना है।

 

केंद्र सरकार के जवाब का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि शुरुआत में केंद्र का तर्क था कि केवल वाहन निर्माता कंपनियां ही माइलेज का आकलन कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिक वाहनों के डैशबोर्ड पर माइलेज की जानकारी दिखाई देती है और वाहन चालक स्वयं भी अपने वाहन की औसत जांच कर सकते हैं।

 

मुख्यमंत्री ने दावा किया कि केंद्र सरकार ने संसद में स्वीकार किया है कि ई-20 पेट्रोल से माइलेज में छह प्रतिशत तक कमी आ सकती है और इसका कुछ वाहनों के इंजन पर प्रभाव पड़ सकता है।

 

ई-20 नीति के उद्देश्य पर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह मामला केवल इथेनॉल मिश्रण तक सीमित नहीं है, बल्कि अमेरिका के साथ व्यापार समझौते से भी जुड़ा हुआ है। उन्होंने दावा किया कि समझौते के तहत भारत अगले पांच वर्षों में इथेनॉल आयात को पांच गुना बढ़ाकर लगभग एक अरब लीटर से पांच अरब लीटर तक ले जाएगा, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 20 अरब डॉलर होगी।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि अमेरिका इथेनॉल का बड़ा उत्पादक है और भारतीय उपभोक्ताओं पर इसका आर्थिक बोझ डाला जा रहा है। उन्होंने सवाल किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दबाव में उनकी शर्तें स्वीकार करने के लिए किस मजबूरी के कारण आगे बढ़ना पड़ रहा है।

 

मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार की विदेश और आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि केंद्र के कई फैसले बड़े कॉरपोरेट घरानों के हितों को ध्यान में रखकर लिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत को कहां से कच्चा तेल खरीदना चाहिए, इस संबंध में बाहरी दबाव को स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए।

 

ई-20 लागू करने की समय-सीमा पर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार की योजना पहले वर्ष 2030 तक ई-20 को व्यापक रूप से लागू करने की थी। उन्होंने पूछा कि वर्ष 2026 में इसे लागू करने की इतनी जल्दबाजी क्यों की गई।

 

मुख्यमंत्री ने आशंका जताई कि भविष्य में ई-25 और ई-50 जैसे अधिक इथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन को भी लागू किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसे किसी भी निर्णय से पहले व्यापक वैज्ञानिक अध्ययन, वाहन निर्माताओं की राय और उपभोक्ताओं से परामर्श किया जाना चाहिए।

 

पंजाब विधानसभा के रुख का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सदन में इस राष्ट्रीय मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की गई। उन्होंने कहा कि भाजपा के सदस्यों ने बहस में हिस्सा नहीं लिया, जबकि पंजाब सरकार आम लोगों के हितों की रक्षा के लिए इस मुद्दे को प्रमुखता से उठा रही है।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले लोगों को लेडेड और अनलेडेड पेट्रोल में से चुनाव करने का विकल्प मिलता था। इसी प्रकार अब भी उपभोक्ताओं को शुद्ध पेट्रोल और ई-20 में से अपनी जरूरत और वाहन की क्षमता के अनुसार ईंधन चुनने की सुविधा मिलनी चाहिए।

 

उन्होंने कहा कि दुनिया के कई देशों में लोगों को टोल वाली और बिना टोल वाली सड़कों में से चुनाव करने का विकल्प मिलता है। मुख्यमंत्री ने पंजाब में 19 टोल प्लाजा बंद किए जाने का उल्लेख करते हुए दावा किया कि इससे यात्रियों को प्रतिदिन करीब 67 लाख रुपये की बचत हो रही है।

 

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब सरकार की मांग स्पष्ट है कि पेट्रोल पंपों पर उपभोक्ताओं को शुद्ध पेट्रोल और ई-20 में से चुनाव करने की स्वतंत्रता दी जाए तथा ई-20 की कीमत शुद्ध पेट्रोल से कम रखी जाए।

 

उन्होंने बताया कि इस संबंध में प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय तथा अन्य संबंधित अधिकारियों को पत्र लिखकर आम लोगों के हितों की रक्षा करने की अपील की गई है।

Published on: 05 Aug 2026

Global Admin
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