दिल्ली में नीट परीक्षा के मुद्दे पर जारी छात्र आंदोलन के बीच जालंधर में प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए भाजपा नेता विजय सांपला ने वर्तमान स्थिति पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि देश में हर नागरिक को विरोध जताने और प्रदर्शन करने का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन इसके लिए कुछ स्थान और सीमाएं निर्धारित की जाती हैं।
प्रदर्शनकारियों को तय सीमा से आगे जाने की अनुमति नहीं होती, परंतु हालिया प्रदर्शनों के दौरान नियमों का खुलेआम उल्लंघन किया गया। सांपला ने आरोप लगाया कि इस पूरे आंदोलन में छात्रों को ढाल बनाकर कुछ राजनीतिक दलों द्वारा उकसाया जा रहा है।
कांग्रेस पार्टी पर सीधा हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि राहुल गांधी लोकसभा के जिम्मेदार सदस्य हैं और उन्हें देश के कानून तथा नियमों की भली-भांति जानकारी है। राहुल गांधी के पास इस महत्वपूर्ण मुद्दे को संसद के पटल पर उठाने का पूरा अवसर था, लेकिन उन्होंने संसद में सार्थक बहस करने के बजाय सड़क पर बैठकर प्रदर्शन करना चुना और नियमों की अनदेखी की। भाजपा नेता ने आगे कहा कि विपक्षी दल पहले संसद में चर्चा कराने के लिए समय की मांग करते थे, लेकिन जब उन्हें चर्चा का समय दिया गया तो वे पीछे हट गए। इससे यह साफ जाहिर होता है कि विपक्ष संसद के भीतर चर्चा नहीं करना चाहता, बल्कि इस संवेदनशील विषय पर केवल राजनीति चमकाना चाहता है। सांपला ने स्पष्ट किया कि भाजपा सरकार देश के युवाओं के भविष्य को लेकर पूरी तरह चिंतित है और उनके हित में कई कल्याणकारी योजनाएं चला रही है। बजट का उल्लेख करते हुए सांपला ने कहा कि पिछली सरकारों के कार्यकाल में युवाओं से जुड़ा बजट मात्र 8 लाख करोड़ था, लेकिन भाजपा सरकार के समय इसे व्यवस्थित कर डेढ़ लाख करोड़ किया गया।
नीट परीक्षा विवाद पर बात करते हुए उन्होंने बताया कि पेपर लीक मामले में कड़ी कार्रवाई की जा रही है और अब तक कई दोषियों की गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। इतना ही नहीं, नीट परीक्षा का आयोजन दोबारा करवाकर इसके नतीजे भी पारदर्शी तरीके से घोषित किए जा चुके हैं।
कांग्रेस शासित राज्यों पर सवाल उठाते हुए उन्होंने पूछा कि तेलंगाना और कर्नाटक जैसे राज्यों में जब पेपर लीक की घटनाएं सामने आती हैं, तो कांग्रेस पार्टी पूरी तरह चुप क्यों रहती है?
सांपला ने बताया कि केंद्र सरकार ने नीट पेपर लीक मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच सीबीआई को सौंप दी है। इसके अलावा, देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं इस केस की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिए तेजी से चलाने के सख्त आदेश दिए हैं। सरकार की ओर से युवाओं से अपील की गई है कि यदि उनके पास पेपर लीक से जुड़ी कोई भी पुख्ता जानकारी है, तो वे निसंकोच होकर प्रशासन के साथ साझा करें।
प्रदर्शन के दौरान हुए लाठीचार्ज के संदर्भ में सफाई देते हुए उन्होंने कहा कि छात्रों को केवल जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने की अनुमति दी गई थी। हालांकि, प्रदर्शनकारी छात्र अनुमति का उल्लंघन करते हुए संसद भवन की ओर कूच करने लगे। इस दौरान हुई धक्का-मुक्की में कई पुलिसकर्मी भी घायल हुए। इसके बावजूद, केंद्र सरकार ने पूरी संवेदनशीलता दिखाते हुए घटना की निष्पक्ष जांच के आदेश दिए हैं और दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश जारी किए हैं।