विश्व हाइपरटेंशन दिवस पर पंजाब सरकार का फोकस: रोकथाम, समय पर पहचान और कैशलेस इलाज
चंडीगढ़, 17 मई:
विश्व हाइपरटेंशन दिवस के अवसर पर पंजाब सरकार ने हाई ब्लड प्रेशर यानी हाइपरटेंशन के खिलाफ अपनी स्वास्थ्य सेवाओं और योजनाओं को और मजबूत करने पर जोर दिया है। सरकार का कहना है कि रोकथाम, शुरुआती पहचान और समय पर इलाज के जरिए इस “साइलेंट किलर” से होने वाली गंभीर बीमारियों को काफी हद तक रोका जा सकता है।
पंजाब सरकार की “मुख्यमंत्री सेहत योजना”, “सीएम दी योगशाला” और “आम आदमी क्लीनिक” जैसी पहलें मिलकर राज्य में हाइपरटेंशन के खिलाफ एक व्यापक सुरक्षा कवच तैयार कर रही हैं। सरकार के अनुसार राज्यभर में अब तक 30 वर्ष से अधिक आयु के 1 करोड़ से ज्यादा लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है, जबकि करीब 24 लाख लोगों को उपचार से जोड़ा गया है।
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने बताया कि 990 आम आदमी क्लीनिकों सहित सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर नियमित रूप से ब्लड प्रेशर की जांच की जा रही है। मरीजों को मुफ्त दवाइयां, मासिक फॉलोअप और जरूरत पड़ने पर समय पर रेफरल सुविधा भी उपलब्ध करवाई जा रही है।
डॉक्टरों के अनुसार हाइपरटेंशन को “साइलेंट किलर” इसलिए कहा जाता है क्योंकि कई बार इसके लक्षण दिखाई नहीं देते, लेकिन यह स्ट्रोक, हार्ट फेलियर और किडनी रोग जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक गलत खानपान, तनाव, धूम्रपान, शारीरिक गतिविधि की कमी और अनियमित जीवनशैली इसके प्रमुख कारण हैं।
सरकार की “सीएम दी योगशाला” पहल के तहत राज्यभर में 10,600 से अधिक योग कक्षाएं चलाई जा रही हैं, जिनमें करीब 3 लाख लोग हिस्सा ले रहे हैं। इसका उद्देश्य लोगों को तनाव प्रबंधन, योग और स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक करना है ताकि हाइपरटेंशन और अन्य जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों को नियंत्रित किया जा सके।
सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं राजिंद्रा अस्पताल, पटियाला के कार्डियोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. सौरभ शर्मा ने कहा कि अब हाई ब्लड प्रेशर केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने बताया कि किशोरों और 20 से 30 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं में भी तेजी से मामले सामने आ रहे हैं। तनाव, खराब खानपान, व्यायाम की कमी और अनियमित दिनचर्या इसके प्रमुख कारण बन रहे हैं।
राज्य स्वास्थ्य एजेंसी के आंकड़ों के अनुसार गुरदासपुर और एस.ए.एस. नगर जैसे जिलों में 90 वर्ष से अधिक आयु के मरीज भी दर्ज किए गए हैं। वहीं पटियाला, जालंधर, होशियारपुर, फरीदकोट, अमृतसर और लुधियाना में पुरुषों और महिलाओं दोनों में बड़ी संख्या में मामले सामने आए हैं।
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत स्ट्रोक, हृदय संबंधी आपात स्थितियों और किडनी रोगों के इलाज का खर्च भी वहन किया जा रहा है। इससे मरीजों और उनके परिवारों को आर्थिक राहत मिल रही है और लोग समय रहते अस्पताल पहुंचकर इलाज करवा पा रहे हैं।