जालंधर। जालंधर में ADCP-2 के पद पर PPS अधिकारी माधवी शर्मा की तैनाती के बाद पुलिस की कार्रवाई को लेकर शहर में चर्चा तेज हो गई है। दावा किया जा रहा है कि जिन कथित गैंगस्टर ठिकानों पर पहले पुलिस कार्रवाई सीमित रहने के आरोप लगते रहे हैं, वहां अब पुलिस ने सख्त रुख अपनाना शुरू किया है।
इसी कड़ी में अमन फतेह गैंग से कथित तौर पर जुड़े ठिकानों पर पुलिस द्वारा छापेमारी किए जाने की जानकारी सामने आई है। कार्रवाई के दौरान अमन के पिता सेमा को पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने की बात कही जा रही है। हालांकि, इसी दौरान भीड़ द्वारा सेमा को कथित तौर पर पुलिस की गिरफ्त से छुड़ाकर ले जाने की सूचना भी सामने आई है। मामले में पुलिस की ओर से आधिकारिक रूप से क्या कार्रवाई की गई, इसे लेकर स्थिति स्पष्ट होना अभी बाकी है।
रेड से पहले सूचना लीक होने का आरोप, SHO पर कार्रवाई की चर्चा
मामले ने उस समय और गंभीर रूप ले लिया जब थाना बस्ती बावा खेल के SHO जय इंदर पर कथित तौर पर रेड से पहले सूचना लीक करने के आरोप लगे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस मामले में SHO को निलंबित किए जाने की बात सामने आई है।
यदि रेड से पहले पुलिस कार्रवाई की जानकारी लीक होने की पुष्टि होती है तो यह पुलिस के आंतरिक तंत्र और गोपनीयता व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर सकता है। हालांकि, निलंबन के वास्तविक कारण और विभागीय कार्रवाई की आधिकारिक स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है।
देवी तालाब मंदिर मामले को लेकर भी उठ रहे सवाल
इसी बीच श्री देवी तालाब मंदिर से जुड़े उस पुराने घटनाक्रम को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं, जिसमें मेयर विनीत धीर की शुक्राना यात्रा के दौरान कथित तौर पर पथराव हुआ था।
अब चर्चा यह है कि यदि उस घटना में किसी गैंगस्टर समूह या आपराधिक तत्वों की भूमिका की आशंका थी तो उस समय पुलिस द्वारा कितनी प्रभावी कार्रवाई की गई थी। क्या संदिग्ध ठिकानों पर छापेमारी हुई थी? कितने लोगों की पहचान हुई और कितने लोगों से पूछताछ या गिरफ्तारी की गई?
इन सवालों के जवाब सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि उस मामले में पुलिस की कार्रवाई कितनी प्रभावी रही थी।
FIR को लेकर भी स्थिति स्पष्ट करने की मांग
देवी तालाब मंदिर पथराव मामले को लेकर कुछ लोगों द्वारा न्यायालय का रुख करने की तैयारी की चर्चा भी सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि संभावित याचिका में पुलिस से यह स्पष्ट करने की मांग की जा सकती है कि घटना को लेकर FIR दर्ज हुई थी या नहीं।
यदि FIR दर्ज हुई थी तो अब तक कितनी गिरफ्तारियां हुईं, कितने संदिग्धों की पहचान हुई और जांच किस स्तर पर पहुंची—इन सवालों पर भी जवाब मांगा जा सकता है। वहीं यदि FIR दर्ज नहीं हुई तो उसके कारणों को लेकर भी सवाल उठना स्वाभाविक है।
क्या अब बदलेगा जालंधर का पुलिसिंग मॉडल?
ADCP-2 माधवी शर्मा की कथित छापेमारी के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या जालंधर पुलिस अब अपराध और गैंगस्टर नेटवर्क के खिलाफ अधिक सक्रिय एवं लक्षित कार्रवाई करेगी।
फिलहाल सामने आई कार्रवाई को लेकर चर्चाएं तेज हैं, लेकिन किसी भी अभियान की वास्तविक सफलता का आकलन गिरफ्तारियों, जांच की प्रगति, बरामदगी और अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर ही किया जा सकेगा।
शहर की नजर अब इस बात पर है कि पुलिस की यह कार्रवाई आगे कितनी दूर तक पहुंचती है और क्या कथित आपराधिक नेटवर्क की जड़ों तक जांच पहुंच पाती है या आने वाले दिनों में अभियान की रफ्तार धीमी पड़ जाती है।