जिसे मृत समझकर कर दिया अंतिम संस्कार, वह 20 दिन बाद जेल में जिंदा मिला
कपूरथला में हैरान करने वाला मामला, कपड़ों के आधार पर परिवार ने की थी शव की पहचान; अब अज्ञात शव की असली पहचान बनी पुलिस के लिए पहेली
कपूरथला। कपूरथला से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां जिस युवक को मृत समझकर परिवार ने अंतिम संस्कार कर दिया और अंतिम रस्में भी पूरी कर दीं, वही युवक करीब 20 दिन बाद कपूरथला केंद्रीय जेल में जिंदा मिला। जेल कर्मचारी के फोन के बाद परिवार को जब इसकी जानकारी मिली तो उन्हें पहले विश्वास नहीं हुआ, लेकिन जेल पहुंचने पर बेटे रवि कुमार को सामने जिंदा देखकर परिवार के होश उड़ गए।
9 अगस्त को मिला था अज्ञात शव
पुलिस के अनुसार, कादूपुर निवासी टीटी का 25 वर्षीय बेटा रवि कुमार 5 अगस्त से लापता था। परिवार ने उसकी तलाश करने के बाद पुलिस को गुमशुदगी की सूचना दी थी। इसी दौरान 9 अगस्त को कांजली रोड के पास एक अज्ञात युवक का शव बरामद हुआ। शव की हालत खराब होने के कारण चेहरे से पहचान करना मुश्किल था।
पुलिस ने पहचान के लिए रवि के परिवार को बुलाया। परिजनों ने शव पर पहने कपड़ों के आधार पर उसकी पहचान रवि कुमार के रूप में कर दी।
13 अगस्त को किया अंतिम संस्कार
शव की पहचान रवि के रूप में होने के बाद पुलिस ने उसे परिवार के हवाले कर दिया। परिजनों ने 13 अगस्त को पूरे रीति-रिवाज के साथ अंतिम संस्कार कर दिया। इसके बाद 15 अगस्त को अंतिम रस्में और भोग भी संपन्न कर दिया गया।
परिवार को इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि उनका बेटा उस समय जीवित था और कपूरथला केंद्रीय जेल में बंद था।
जेल कर्मचारी के फोन ने खोला राज
मामले में अचानक नया मोड़ तब आया, जब कपूरथला केंद्रीय जेल के एक कर्मचारी ने परिवार को फोन कर बताया कि रवि कुमार जेल में बंद है। शुरुआत में परिजनों को इस बात पर यकीन नहीं हुआ। जब कर्मचारी ने रवि से उनकी बात करवाई, तो परिवार जेल पहुंचा।
जेल में बेटे को जिंदा देखकर परिजनों के पैरों तले जमीन खिसक गई। जिस युवक का वे अंतिम संस्कार कर चुके थे, उसके जिंदा होने की खबर ने पूरे मामले को रहस्य में बदल दिया।
5 अगस्त से जेल में था रवि
पुलिस जांच के अनुसार रवि कुमार 5 अगस्त से ही कपूरथला केंद्रीय जेल में बंद था, जबकि 9 अगस्त को कांजली रोड के पास अज्ञात शव बरामद हुआ था। पुलिस रिकॉर्ड में रवि से संबंधित कपूरथला और जालंधर सिटी की DDR एंट्रियां होने की बात भी सामने आई है।
परिवार के अनुसार रवि ने बताया कि उसे जालंधर पुलिस ने आवारागर्दी से संबंधित मामले में पकड़ा था। पुलिस अधिकारी के मुताबिक, उसके खिलाफ BNSS की धारा 128 के तहत कार्रवाई की गई थी, जिसके बाद उसे जेल भेज दिया गया।
अब सबसे बड़ा सवाल—आखिर किसका हुआ अंतिम संस्कार?
इस घटना ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब रवि 5 अगस्त से जेल में था तो 9 अगस्त को मिले अज्ञात शव की पहचान उसके रूप में कैसे हुई? क्या केवल कपड़ों के आधार पर शव की पहचान करना पर्याप्त था और पहचान की पुष्टि के लिए अन्य जरूरी प्रक्रियाएं क्यों नहीं अपनाई गईं?
DSP शीतल सिंह के अनुसार, पूरे मामले की जांच की जा रही है। जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि शव की पहचान में गलती किस स्तर पर हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों या कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
अब पुलिस के सामने सबसे अहम चुनौती कांजली रोड पर मिले शव की वास्तविक पहचान पता करना है। आखिर वह युवक कौन था, उसका शव वहां कैसे पहुंचा और किस परिवार ने अनजाने में अपने किसी अन्य सदस्य का अंतिम संस्कार कर दिया—इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आएंगे।