पंजाब कांग्रेस को मिला नया प्रभारी, सचिन पायलट संभालेंगे कमान
राहुल गांधी के दौरे से पहले कांग्रेस हाईकमान का बड़ा फैसला, भूपेश बघेल को असम की जिम्मेदारी
चंडीगढ़। पंजाब कांग्रेस में जारी अंदरूनी खींचतान और संगठनात्मक हलचल के बीच कांग्रेस हाईकमान ने बड़ा रणनीतिक फैसला लेते हुए वरिष्ठ नेता और राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट को पंजाब कांग्रेस का नया प्रभारी नियुक्त किया है। यह फैसला लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के प्रस्तावित पंजाब दौरे से ठीक पहले लिया गया है, जिसे पार्टी के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत माना जा रहा है।
संगठन में हुए इस फेरबदल के तहत सचिन पायलट पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की जगह पंजाब मामलों की जिम्मेदारी संभालेंगे। वहीं, भूपेश बघेल को पंजाब के प्रभार से मुक्त करते हुए असम कांग्रेस का नया प्रभारी बनाया गया है।
चन्नी गुट की नाराजगी के बीच बदलाव
पंजाब कांग्रेस में यह बदलाव ऐसे समय हुआ है जब पूर्व मुख्यमंत्री Charanjit Singh Channi के समर्थक प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष Amrinder Singh Raja Warring को पद पर बनाए रखने के फैसले से नाराज बताए जा रहे थे। चन्नी गुट लंबे समय से संगठन में बदलाव और नए नेतृत्व की मांग उठा रहा था।
पार्टी के भीतर चल रही गुटबाजी और नेतृत्व को लेकर असंतोष के बीच हाईकमान ने अब पंजाब की जिम्मेदारी सचिन पायलट को सौंपकर नए समीकरण बनाने की कोशिश की है।
गुटबाजी खत्म करने की चुनौती
पंजाब कांग्रेस पिछले कुछ समय से आपसी खींचतान और नेताओं के बीच मतभेदों के कारण चर्चा में रही है। ऐसे में संगठन को मजबूत करने और विभिन्न धड़ों के बीच तालमेल स्थापित करने की जिम्मेदारी अब सचिन पायलट के कंधों पर होगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि युवा नेतृत्व की पहचान रखने वाले पायलट को संगठनात्मक क्षमता और कार्यकर्ताओं से जुड़ाव के कारण यह अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है। पार्टी नेतृत्व को उम्मीद है कि वह असंतुष्ट नेताओं को साथ लेकर संगठन को आगामी चुनावी चुनौतियों के लिए तैयार करेंगे।
भूपेश बघेल को असम की कमान
पूर्व मुख्यमंत्री Bhupesh Baghel को अब असम कांग्रेस का प्रभारी नियुक्त किया गया है। कांग्रेस नेतृत्व ने उनके राजनीतिक अनुभव का उपयोग पूर्वोत्तर राज्य में संगठन को मजबूत करने के उद्देश्य से करने का निर्णय लिया है।
राहुल गांधी के प्रस्तावित पंजाब दौरे से पहले हुए इस बड़े संगठनात्मक बदलाव को कांग्रेस की चुनावी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। पार्टी नेतृत्व स्पष्ट संकेत देना चाहता है कि पंजाब में संगठन को मजबूत करने और आंतरिक मतभेदों को खत्म करने के लिए वह सक्रिय रूप से कदम उठा रहा है।