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लुधियाना सिविल अस्पताल में एक साल से फोरेंसिक विशेषज्ञों के पद खाली, पोस्टमार्टम और मेडिको-लीगल सेवाएं प्रभावित

09 Jul 2026 | 213 Views

लुधियाना सिविल अस्पताल में एक साल से फोरेंसिक विशेषज्ञों के पद खाली, पोस्टमार्टम और मेडिको-लीगल सेवाएं प्रभावित

लुधियाना सिविल अस्पताल में एक साल से फोरेंसिक विशेषज्ञों के पद खाली, पोस्टमार्टम और मेडिको-लीगल सेवाएं प्रभावित

 मानवाधिकार आयोग ने मांगी रिपोर्ट, विशेषज्ञों की कमी के कारण दूसरे संस्थानों पर निर्भर सरकारी अस्पताल

लुधियाना के जिला सिविल अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की गंभीर स्थिति उजागर हुई है। अस्पताल में पिछले लगभग एक वर्ष से फोरेंसिक मेडिसिन विशेषज्ञ के नियमित पद खाली पड़े हैं, जिसके कारण हत्या, आत्महत्या और संदिग्ध मौतों से जुड़े पोस्टमार्टम तथा मेडिको-लीगल मामलों के निपटारे पर असर पड़ रहा है। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए पंजाब राज्य एवं चंडीगढ़ (यूटी) मानवाधिकार आयोग ने भी रिपोर्ट तलब की है।

जानकारी के अनुसार, लुधियाना सिविल अस्पताल में फोरेंसिक विशेषज्ञ नहीं होने के कारण जटिल मामलों में डॉक्टरों को बाहरी संस्थानों की सहायता लेनी पड़ रही है। अस्पताल प्रशासन जरूरत पड़ने पर डीएमसीएच, सीएमसीएच, ईएसआई अस्पताल तथा दोराहा में तैनात फोरेंसिक विशेषज्ञों से राय प्राप्त करता है।

स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों का कहना है कि निजी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में फोरेंसिक विशेषज्ञों की उपलब्धता पर्याप्त है। डीएमसीएच में 4, सीएमसीएच में 3 तथा ईएसआई मॉडल अस्पताल में 1 फोरेंसिक विशेषज्ञ सेवाएं दे रहे हैं, जबकि जिला सिविल अस्पताल जैसे बड़े सरकारी संस्थान में नियमित विशेषज्ञ की नियुक्ति नहीं हो सकी है।

सूत्रों के अनुसार, दोराहा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात फोरेंसिक विशेषज्ञ डॉ. चरणकमल को एसएमओ की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। बताया जाता है कि वह चंडीगढ़ में असिस्टेंट डायरेक्टर मेडिको-लीगल सर्विसेज का कार्यभार भी संभाल रहे हैं। डॉ. चरणकमल वर्ष 2021 से सितंबर 2024 तक लुधियाना सिविल अस्पताल में तैनात रहे थे। उनके स्थानांतरण के बाद कुछ समय के लिए खन्ना से एक विशेषज्ञ की सेवाएं ली गईं, लेकिन पिछले करीब एक वर्ष से अस्पताल में नियमित फोरेंसिक विशेषज्ञ नहीं है।

इस बीच, पंजाब सरकार द्वारा विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए शुरू की गई इम्पैनलमेंट योजना भी अपेक्षित परिणाम नहीं दे पाई है। स्वास्थ्य विभाग ने निजी और सेवानिवृत्त विशेषज्ञों को सरकारी अस्पतालों से जोड़ने की पहल की थी, लेकिन विशेषज्ञ डॉक्टरों की भर्ती और उपलब्धता अब भी चुनौती बनी हुई है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इम्पैनलमेंट नीति में फोरेंसिक मेडिसिन विशेषज्ञों को भी प्रभावी रूप से शामिल किया जाए, तो जिला सिविल अस्पताल जैसे संस्थानों को राहत मिल सकती है और मेडिको-लीगल मामलों के निपटारे में तेजी लाई जा सकती है।

Published on: 09 Jul 2026

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