चंडीगढ़। पंजाब के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के लंबे समय से लंबित महंगाई भत्ता (डीए) और महंगाई राहत (डीआर) के बकाये से जुड़े महत्वपूर्ण मामले में मंगलवार को भी पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में कोई अंतिम फैसला नहीं हो सका। अब इस मामले की अगली सुनवाई 9 जुलाई को निर्धारित की गई है, जिस पर लाखों कर्मचारियों और पेंशनरों की नजरें टिकी हुई हैं।
गौरतलब है कि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने 8 अप्रैल को पंजाब सरकार को निर्देश दिया था कि वह 30 जून तक कर्मचारियों और पेंशनरों के बकाया डीए और डीआर का भुगतान करे। सिंगल बेंच के इस आदेश को पंजाब सरकार ने डिवीजन बेंच में चुनौती दी थी।
हालांकि डिवीजन बेंच ने सिंगल बेंच के आदेश पर कोई रोक नहीं लगाई, लेकिन राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वह बकाया भुगतान के संबंध में अपनी योजना सीलबंद लिफाफे में अदालत के समक्ष पेश करे। अब अगली सुनवाई के दौरान अदालत यह स्पष्ट करेगी कि सरकार ने भुगतान के लिए क्या रोडमैप तैयार किया है।
माना जा रहा है कि सरकार अदालत को किस्तों में भुगतान का प्रस्ताव दे सकती है या फिर राज्य की वित्तीय स्थिति का हवाला देते हुए अतिरिक्त समय की मांग कर सकती है। पिछली सुनवाई के दौरान कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रोहित कपूर की डिवीजन बेंच ने सरकार के पक्ष पर कई महत्वपूर्ण सवाल उठाए थे।
राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता दीपिंदर सिंह पटवालिया ने अदालत में दलील दी थी कि डीए और डीआर के भुगतान के मामले में पंजाब सरकार केंद्र सरकार की नीति को अपनाने के लिए बाध्य नहीं है। सरकार ने यह भी कहा था कि इस विषय पर निर्णय राज्य की वित्तीय स्थिति और लागू नियमों को ध्यान में रखकर ही लिया जा सकता है।
सरकार की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने मामले के कानूनी पहलुओं पर विस्तृत सुनवाई की आवश्यकता जताई थी और सुनवाई को 7 जुलाई तक स्थगित कर दिया था। मंगलवार को भी कोई निर्णय नहीं हो पाया, जिसके बाद अब मामले की अगली सुनवाई 9 जुलाई को होगी।
दूसरी ओर, सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों की ओर से दायर याचिकाओं में मांग की गई है कि केंद्र सरकार की तर्ज पर उन्हें बकाया डीए और डीआर का भुगतान समयबद्ध तरीके से किया जाए। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि लंबे समय से बकाया राशि न मिलने के कारण कर्मचारियों और सेवानिवृत्त कर्मियों को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
उल्लेखनीय है कि इस मामले में हाईकोर्ट पहले भी कई बार पंजाब सरकार से जवाब मांग चुका है। सिंगल बेंच पहले ही कर्मचारियों और पेंशनरों के पक्ष में आदेश दे चुकी है, जबकि राज्य सरकार उस आदेश के खिलाफ अपील पर सुनवाई का इंतजार कर रही है। अब 9 जुलाई की सुनवाई में यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि सरकार बकाया भुगतान को लेकर क्या रुख अपनाती है और अदालत इस पर क्या निर्देश जारी करती है।