पंजाब की ग्रुप-डी भर्ती परीक्षा में फर्जीवाड़ा, असली उम्मीदवारों की जगह ‘मुन्नाभाई’ देते मिले पेपर
दस्तावेजों की जांच में खुली पोल, दो उम्मीदवारों के खिलाफ धोखाधड़ी और साजिश का मामला दर्ज
पंजाब में सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया को चूना लगाने की एक बड़ी साजिश का खुलासा हुआ है। ग्रुप-डी पदों के लिए आयोजित लिखित परीक्षा के दौरान दो उम्मीदवारों की जगह फर्जी व्यक्तियों के परीक्षा देने का मामला सामने आया है। मामले का खुलासा होने के बाद पुलिस ने संबंधित उम्मीदवारों के खिलाफ धोखाधड़ी और साजिश रचने के आरोप में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार, यह मामला उस समय सामने आया जब परीक्षा से संबंधित दस्तावेजों की जांच के दौरान गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। स्कूल के प्रिंसिपल नरेश कुमार को प्राप्त दस्तावेजों और रिकॉर्ड की पड़ताल में पता चला कि परीक्षा में शामिल हुए कुछ व्यक्तियों की पहचान आवेदन करने वाले वास्तविक उम्मीदवारों से मेल नहीं खा रही थी।
शिकायत के आधार पर थाना दरेसी पुलिस ने उम्मीदवार बिजेंद्र और अंकुश के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस के अनुसार, दोनों उम्मीदवार पंजाब सरकार की ग्रुप-डी भर्ती प्रक्रिया के तहत आयोजित परीक्षा में स्वयं शामिल नहीं हुए, बल्कि उनकी जगह अन्य व्यक्तियों को परीक्षा केंद्र में बैठाया गया।
गौरतलब है कि पंजाब सरकार की ग्रुप-डी भर्तियों के लिए 5 अप्रैल को राज्यभर के विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर लिखित परीक्षा आयोजित की गई थी। लुधियाना में भी कई केंद्रों पर अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी थी। जांच में सामने आया कि कुछ उम्मीदवारों ने परीक्षा प्रणाली को धोखा देने के लिए कथित तौर पर बाहरी व्यक्तियों की मदद ली और उन्हें अपनी जगह परीक्षा देने भेज दिया।
सूत्रों के अनुसार, परीक्षा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को चकमा देकर फर्जी परीक्षार्थी परीक्षा हॉल में प्रवेश करने में सफल रहे। उन्होंने वास्तविक उम्मीदवारों के स्थान पर बैठकर प्रश्नपत्र हल किया। हालांकि परीक्षा समाप्त होने के बाद बोर्ड अधिकारियों द्वारा उम्मीदवारों के हस्ताक्षरों, फोटोग्राफ और अन्य दस्तावेजों का मिलान किया गया, जिसमें पहचान संबंधी विसंगतियां सामने आ गईं।
जांच के दौरान यह भी पाया गया कि परीक्षा देने वाले व्यक्तियों के चेहरे और पहचान विवरण वास्तविक आवेदकों से मेल नहीं खाते थे। इसके बाद मामले की रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजी गई, जिन्होंने तत्काल कानूनी कार्रवाई के निर्देश जारी किए।
पुलिस का कहना है कि मामले की गहन जांच की जा रही है और परीक्षा में बैठने वाले फर्जी व्यक्तियों की पहचान कर उन्हें जल्द गिरफ्तार किया जाएगा। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस कथित फर्जीवाड़े के पीछे कोई संगठित गिरोह सक्रिय था या नहीं।
अधिकारियों का मानना है कि भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जरूरी है, ताकि भविष्य में कोई भी अभ्यर्थी या गिरोह परीक्षा प्रणाली के साथ खिलवाड़ करने का प्रयास न कर सके।