पंजाब सरकार कर्मचारी-पेंशनर्स के हित में, सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले का करेगी पालन: सरकार
डीए मामले में सरकार ने कहा- हाईकोर्ट के आदेश का सम्मान, सुप्रीम कोर्ट में कानूनी प्रक्रिया जारी; कर्मचारियों को पहले ही 8% डीए बढ़ोतरी दी गई।
चंडीगढ़, 22 सितंबर:
पंजाब सरकार ने महंगाई भत्ते (DA) और महंगाई राहत (DR) से जुड़े विवाद के बीच कहा है कि वह कर्मचारियों और पेंशनर्स के हितों के लिए प्रतिबद्ध है तथा अदालतों के आदेशों का पूरी तरह पालन करेगी। सरकार ने कहा कि डीए/डीआर से संबंधित मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है और सभी संबंधित पक्षों को सर्वोच्च अदालत के अंतिम फैसले की प्रतीक्षा करनी चाहिए।
पंजाब सरकार ने अपने बयान में कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही के अंतिम परिणाम की प्रतीक्षा किए बिना कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए 8 प्रतिशत डीए बढ़ोतरी की घोषणा की है। इस बढ़ोतरी के बाद डीए की दर 50 प्रतिशत हो गई है। सरकार के अनुसार यह निर्णय लगभग आठ लाख कर्मचारियों और पेंशनर्स को प्रभावित करेगा।
हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची सरकार
डीए के बकाया भुगतान को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को लंबित डीए/डीआर किस्तें केंद्रीय पैटर्न के अनुसार जारी करने के निर्देश दिए थे। अगस्त 2026 में डिवीजन बेंच ने भी संबंधित अपीलों को खारिज करते हुए निर्देशों की पुष्टि की और लंबित डीए/डीआर किस्तों को आईएएस, आईपीएस और आईएफएस अधिकारियों को मिल रही दरों के अनुरूप जारी करने को कहा।
इसके बाद राज्य सरकार ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। सरकार का कहना है कि सर्वोच्च अदालत में कानूनी उपाय अपनाना न्यायपालिका का अनादर नहीं है, बल्कि यह संविधान द्वारा उपलब्ध कानूनी अधिकारों के तहत उठाया गया कदम है।
8% डीए बढ़ोतरी से कर्मचारियों को राहत
18 सितंबर को पंजाब सरकार ने कर्मचारियों और पेंशनर्स के साथ बैठक के बाद 8 प्रतिशत डीए बढ़ाने की घोषणा की थी। यह बढ़ोतरी दो किस्तों में लागू की जानी है और डीए 42 प्रतिशत से बढ़कर 50 प्रतिशत होगा।
हालांकि, लंबित डीए/डीआर बकाया का बड़ा हिस्सा अभी विवाद का विषय बना हुआ है। हाईकोर्ट के रिकॉर्ड के अनुसार लंबित बकाया की कुल देनदारी करीब ₹14,191 करोड़ बताई गई थी और सरकार ने इसके भुगतान के लिए चरणबद्ध योजना का हवाला दिया था।
सरकार ने दोहराया कि वह कर्मचारियों और पेंशनर्स के साथ बातचीत जारी रखेगी और सुप्रीम कोर्ट का जो भी अंतिम फैसला आएगा, उसे लागू करेगी। सरकार ने कहा कि कर्मचारियों के हितों और न्यायिक प्रक्रिया—दोनों का सम्मान करते हुए मामले का समाधान किया जाएगा।