श्री अकाल तख्त साहिब सर्वोच्च, बेअदबी के खिलाफ सख्त कानून पर कोई समझौता नहीं: सीएम भगवंत मान
चंडीगढ़, 27 सितंबर: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा है कि श्री अकाल तख्त साहिब सभी के लिए सर्वोच्च हैं और उनकी सरकार श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की पवित्रता की रक्षा के लिए बेअदबी के खिलाफ सबसे सख्त कानूनी ढांचा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बेअदबी के दोषियों के लिए उम्रकैद और भारी जुर्माने का प्रावधान प्रस्तावित कानून का मूल आधार है और इसमें किसी प्रकार की ढील नहीं दी जाएगी।
मुख्यमंत्री आवास पर राज्य सरकार द्वारा गठित सात सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति के साथ हुई बैठक में ‘जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम, 2026’ को लेकर उठी आशंकाओं और सुझावों पर चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने समिति को निर्देश दिए कि वह श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा गठित पैनल के साथ लगातार बैठकें कर सभी सुझावों पर विचार करे और आपसी सहमति के आधार पर आगे की कार्रवाई सुनिश्चित करे।
भगवंत मान ने कहा कि सरकार का मुख्य उद्देश्य ऐसा मजबूत कानून लागू करना है, जिससे भविष्य में कोई भी व्यक्ति बेअदबी जैसा गंभीर अपराध करने का साहस न कर सके। उन्होंने कहा कि इस कानून ने सिख संगत के आहत मनों को राहत देने का काम किया है और पहली बार ऐसे अपराध के बारे में सोचने वालों में भय का माहौल बना है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि धार्मिक क्षेत्र की प्रतिष्ठित हस्तियों, बुद्धिजीवियों और कानूनी विशेषज्ञों को शामिल कर सात सदस्यीय समिति बनाई गई है। यह समिति कानून की प्रत्येक धारा की गहन समीक्षा कर श्री अकाल तख्त साहिब के पैनल के साथ विस्तृत विचार-विमर्श करेगी और राज्य सरकार को आवश्यक सुझाव देगी।
उन्होंने कहा कि प्रस्तावित संशोधनों पर कानूनी, संवैधानिक और अन्य सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए विचार किया जाएगा, ताकि कानून की मूल भावना बरकरार रहे और सभी जायज चिंताओं का समाधान भी हो सके। इसके लिए नोडल अधिकारी के रूप में पीसीएस अधिकारी हरजीत सिंह संधू को समन्वय की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
मुख्यमंत्री ने दोहराया कि राज्य सरकार श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की पवित्रता और मर्यादा की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि बेअदबी की घटनाएं लोगों की धार्मिक भावनाओं को गहरी ठेस पहुंचाती हैं और इन्हें किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
बैठक में पूर्व जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह, बाबा साहिब सिंह, संत बाबा सेवा सिंह रामपुर खेड़ा, न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) जसपाल सिंह, न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) गुरबीर सिंह, आईपीएस (सेवानिवृत्त) जतिंदर सिंह औलख और कानूनी अधिकारी प्रीत इंदर पाल सिंह सहित समिति के सदस्य शामिल हुए। दमदमी टकसाल के प्रमुख संत ज्ञानी हरनाम सिंह खालसा ने ऑनलाइन बैठक में भाग लिया। इसके अलावा पंजाब ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन के निदेशक एल.के. यादव समेत कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।