विश्व हाइपरटेंशन दिवस: पंजाब की मुख्यमंत्री सेहत योजना बनी मरीजों के लिए राहत का सहारा
40 से 90 वर्ष आयु वर्ग सबसे अधिक प्रभावित, 98 वर्षीय मरीज भी लाभान्वित
चंडीगढ़, 15 मई 2026:
विश्व हाइपरटेंशन दिवस के अवसर पर पंजाब सरकार की मुख्यमंत्री सेहत योजना उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन) और उससे जुड़ी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए बड़ी राहत बनकर उभरी है। बढ़ते हाइपरटेंशन मामलों के बीच यह योजना हजारों परिवारों को समय पर उपचार उपलब्ध करवाने के साथ भारी चिकित्सा खर्चों से भी बचा रही है।
हाइपरटेंशन, जिसे आमतौर पर हाई ब्लड प्रेशर कहा जाता है, को डॉक्टर “साइलेंट किलर” मानते हैं क्योंकि यह बिना स्पष्ट लक्षणों के स्ट्रोक, हार्ट फेलियर और किडनी रोग जैसी गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है। अब यह बीमारी केवल बुज़ुर्गों तक सीमित नहीं रही, बल्कि युवाओं और मध्यम आयु वर्ग में भी तेजी से बढ़ रही है।
अस्पतालों में बुज़ुर्ग मरीज जांच रिपोर्ट का इंतजार करते दिखाई देते हैं, महिलाएं दवाइयों की पर्चियां संभालती नजर आती हैं, जबकि युवा मरीज भी बढ़ते ब्लड प्रेशर को लेकर चिंतित दिख रहे हैं। हर मरीज के पीछे एक ऐसा परिवार है जो बीमारी और बढ़ते इलाज खर्च के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार भारत में उच्च रक्तचाप के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। इसके प्रमुख कारण अस्वस्थ खान-पान, तनाव, तंबाकू सेवन, शारीरिक गतिविधियों की कमी और अनियमित जीवनशैली माने जा रहे हैं।
समय पर इलाज बना सबसे बड़ी ताकत
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार कई मरीजों को बीमारी का पता तब चलता है जब गंभीर जटिलताएं पैदा हो चुकी होती हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री सेहत योजना मरीजों के लिए सुरक्षा कवच साबित हो रही है। योजना के तहत स्ट्रोक, हार्ट इमरजेंसी और किडनी रोग जैसे गंभीर मामलों के इलाज एवं अस्पताल में भर्ती का खर्च वहन किया जा रहा है।
राज्य स्वास्थ्य एजेंसी के आंकड़ों के मुताबिक पंजाब में 40 से 80 वर्ष आयु वर्ग सबसे अधिक प्रभावित है। गुरदासपुर में 94 वर्ष तक के मरीज दर्ज किए गए हैं, जबकि एस.ए.एस. नगर में 98 वर्षीय मरीज भी योजना का लाभ ले चुके हैं।
पटियाला, एस.ए.एस. नगर, होशियारपुर, जालंधर और फरीदकोट में पुरुषों और महिलाओं दोनों में बड़ी संख्या में मामले सामने आए हैं। वहीं अमृतसर और लुधियाना में 50 से 77 वर्ष आयु वर्ग की महिलाओं में अधिक मामले दर्ज किए गए हैं।
युवाओं में भी बढ़ रहे मामले
डॉ. सौरभ शर्मा ने कहा कि उच्च रक्तचाप अब केवल बुज़ुर्गों की बीमारी नहीं रह गई है। उन्होंने बताया कि तनाव, खराब खान-पान, व्यायाम की कमी और अनियमित दिनचर्या इसके प्रमुख कारण बन रहे हैं।
उन्होंने कहा कि अब किशोरों और 20 से 30 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं में भी हाइपरटेंशन के मामले सामने आ रहे हैं। साथ ही स्ट्रोक, हार्ट फेलियर और किडनी रोग जैसी जटिलताएं भी पहले की तुलना में कम उम्र में दिखाई देने लगी हैं।
डॉ. शर्मा के अनुसार मुख्यमंत्री सेहत योजना जैसी पहलें इसलिए बेहद महत्वपूर्ण हैं क्योंकि आर्थिक बोझ के डर से कई मरीज इलाज टाल देते हैं। उन्होंने कहा कि “हाइपरटेंसिव इमरजेंसी में इलाज में देरी कई बार जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर साबित होती है।”
मरीजों को मिला सम्मान और आत्मविश्वास
स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि योजना की सबसे बड़ी उपलब्धि केवल इलाज उपलब्ध करवाना नहीं, बल्कि समय पर इलाज सुनिश्चित करना है। पहले कई परिवार आर्थिक संकट के डर से अस्पताल में भर्ती करवाने में देरी करते थे, लेकिन अब मरीज समय रहते चिकित्सा सहायता लेने लगे हैं।
मध्यम वर्गीय परिवारों, पेंशनभोगियों और सरकारी कर्मचारियों के लिए मुख्यमंत्री सेहत योजना भारी चिकित्सा खर्चों के खिलाफ एक मजबूत सुरक्षा कवच बनकर सामने आई है।
विश्व हाइपरटेंशन दिवस पर यह योजना केवल स्वास्थ्य सेवाओं तक सीमित नहीं, बल्कि मरीजों को आर्थिक भय से मुक्त होकर सम्मानपूर्वक इलाज करवाने का आत्मविश्वास भी दे रही है।