श्रद्धालुओं, सेवादारों को परेशान करने या सिख धार्मिक मामलों में दखल देने का कोई इरादा नहीं; ‘बीड़’ और ‘स्वरूप’ जैसे सम्मानजनक शब्दों को एक्ट में शामिल करने के लिए होगा संशोधन
चंडीगढ़, 30 जुलाई।
आम आदमी पार्टी (आप) के सांसद मालविंदर सिंह कंग ने स्पष्ट किया कि पंजाब सरकार द्वारा लाए गए जगत ज्योत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार कानून का उद्देश्य केवल उन लोगों को सख्त सजा दिलाना है, जो जानबूझकर श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी करते हैं या ऐसी घटनाओं की साजिश रचते हैं। उन्होंने कहा कि इस कानून का श्रद्धालुओं, सेवादारों या सिख धार्मिक संस्थाओं को परेशान करने और सिख धार्मिक मामलों में दखल देने का कोई उद्देश्य नहीं है।
गुरुवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कंग ने कहा कि भगवंत मान सरकार सिख संगत की लंबे समय से चली आ रही मांग के जवाब में यह कानून लेकर आई है, ताकि बेअदबी की घटनाओं को रोकने के लिए मजबूत कानूनी ढांचा तैयार किया जा सके और दोषी कानून की गिरफ्त से बच न सकें।
उन्होंने कहा कि पंजाब विधानसभा द्वारा बिल को सर्वसम्मति से पारित किए जाने के बाद श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार साहिब की ओर से कुछ सुझाव दिए गए थे। पंजाब सरकार ने इन सुझावों को पूरे सम्मान के साथ स्वीकार करते हुए संशोधित ड्राफ्ट तैयार किया है। प्रस्तावित संशोधन आगामी विधानसभा सत्र में पेश किए जाएंगे।
कंग ने कहा कि आम आदमी पार्टी की सरकार श्री अकाल तख्त साहिब और सभी सिख धार्मिक संस्थाओं का पूरा सम्मान करती है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य कभी भी सिख धार्मिक मामलों, सिख रहित मर्यादा या धार्मिक संस्थाओं के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप करना नहीं रहा है।
बिल में इस्तेमाल शब्दों को लेकर उठी चिंताओं पर कंग ने कहा कि सरकार सिख परंपराओं के अनुसार श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले सम्मानजनक शब्दों, जैसे ‘बीड़’ और ‘स्वरूप’, को स्पष्ट रूप से शामिल करने के लिए एक्ट में संशोधन करेगी।
उन्होंने ‘कस्टोडियन’ शब्द की व्याख्या करते हुए कहा कि इसका अर्थ किसी प्रकार का मालिकाना हक नहीं है। इसका मतलब उस सेवादार या देखभाल करने वाले व्यक्ति, संस्था, डेरा या गुरुद्वारा कमेटी से है, जिसे श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पवित्र स्वरूपों की सेवा, सुरक्षा और रखरखाव की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
कंग ने स्पष्ट किया कि केवल किसी घटना के होने के आधार पर किसी कस्टोडियन या सेवादार को दोषी नहीं ठहराया जाएगा। यदि कोई घटना अनजाने में हुई गलती, लापरवाही, तकनीकी गड़बड़ी या बिना किसी आपराधिक इरादे के होती है, तो उसे एक्ट के तहत बेअदबी नहीं माना जाएगा और दंडात्मक धाराएं लागू नहीं होंगी।
उन्होंने कहा कि किसी शिकायत के आधार पर किसी कस्टोडियन या केयरटेकर की तुरंत गिरफ्तारी नहीं की जाएगी। हर शिकायत की पहले एसपी या डीसीपी स्तर के अधिकारी द्वारा स्वतंत्र जांच की जाएगी। यह जांच 30 दिनों के भीतर पूरी की जाएगी, जिसे जरूरत पड़ने पर 15 दिन तक बढ़ाया जा सकता है। जांच के दौरान संबंधित शिरोमणि कमेटी अधिकारियों को भी सूचित किया जाएगा। जब तक जांच में जानबूझकर गलत काम या आपराधिक इरादा साबित नहीं हो जाता, तब तक कोई एफआईआर या सख्त कार्रवाई नहीं की जाएगी।
कंग ने कहा कि नगर कीर्तन, आनंद कारज और अन्य धार्मिक कार्यक्रमों के दौरान फोटोग्राफी या लाइव टेलीकास्ट में तकनीकी अथवा अनजाने में हुई गड़बड़ियों पर किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कानून गुरबाणी के धार्मिक, शैक्षणिक, अकादमिक या डिजिटल प्रचार पर कोई रोक नहीं लगाता।
उन्होंने कहा कि कथा, कीर्तन, शोध, धार्मिक चर्चा, नगर कीर्तन, आनंद कारज, फोटोग्राफी, लाइव टेलीकास्ट तथा घरों में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का सम्मानपूर्वक प्रकाश और सुखासन जैसी गतिविधियां इस कानून के दायरे से बाहर रहेंगी। वास्तविक श्रद्धालुओं और सेवादारों को इस कानून से डरने की कोई जरूरत नहीं है।
कंग ने बताया कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के प्रत्येक स्वरूप के लिए यूनिक एन्क्रिप्टेड पहचान संख्या जारी करने और उसका रिकॉर्ड रखने की जिम्मेदारी शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के पास होगी। यह केंद्रीय रजिस्टर पूरी तरह एन्क्रिप्टेड और गोपनीय रहेगा तथा इसे सार्वजनिक नहीं किया जाएगा। श्रद्धालुओं और सेवादारों की निजी जानकारी भी सुरक्षित रखी जाएगी। जांच एजेंसियों को निर्धारित नियमों के अनुसार केवल शिरोमणि कमेटी के माध्यम से ही रिकॉर्ड तक पहुंच दी जाएगी।
उन्होंने कहा कि यह एक्ट विशेष रूप से उन लोगों के खिलाफ है, जो जानबूझकर बेअदबी करते हैं या ऐसी घटनाओं की योजना बनाते अथवा इसमें सहायता करते हैं। ऐसे मामलों में साजिश से संबंधित कानूनी प्रावधान भी लागू होंगे।
कंग ने बताया कि एक्ट में उन मामलों में मेडिकल बोर्ड से जांच कराने का प्रावधान भी रखा गया है, जहां कोई आरोपी मानसिक रूप से अस्वस्थ होने का दावा करता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि इस प्रावधान का दुरुपयोग कर जानबूझकर अपराध करने वाले लोग सजा से न बच सकें।
उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार केंद्र सरकार से भी अपील करेगी कि पूरे देश में बेअदबी की घटनाओं से निपटने के लिए एक समान और प्रभावी कानून बनाया जाए।
कंग ने कहा कि भगवंत मान सरकार का रुख पूरी तरह स्पष्ट है। यह कानून सिख संगत, श्रद्धालुओं, सेवादारों या धार्मिक संस्थाओं के खिलाफ नहीं है। इसका एकमात्र उद्देश्य जानबूझकर श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी करने वालों को कड़ी सजा दिलाना और भविष्य में ऐसी दुखद घटनाओं को रोकना है।