महिला आरक्षण बिल को लेकर देशभर में सियासी हलचल तेज होती जा रही है। इसी कड़ी में भारत भूषण आशु की पत्नी और तीन बार पार्षद रह चुकीं कांग्रेस नेत्री ममता आशु ने सोशल मीडिया पर केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए एक तीखा पोस्ट साझा किया है, जिसने राजनीतिक बहस को नया मोड़ दे दिया है।
ममता आशु ने अपने पोस्ट में स्पष्ट किया कि वे महिला आरक्षण की समर्थक हैं, लेकिन इसके लागू करने के तरीके पर गंभीर आपत्ति जताई। उन्होंने सवाल उठाया कि जब 33 प्रतिशत आरक्षण देना ही है, तो इसे सीधे मौजूदा लोकसभा की 543 सीटों में ही क्यों नहीं लागू किया जा रहा।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि क्या यह मान लिया जाए कि मौजूदा जनप्रतिनिधि अपनी सीटें छोड़ने को तैयार नहीं हैं, इसलिए महिलाओं के लिए अलग से नई सीटें जोड़ने का रास्ता अपनाया जा रहा है। उनके अनुसार, यदि सरकार वास्तव में महिला सशक्तिकरण के प्रति गंभीर है, तो उसे राजनीतिक इच्छाशक्ति और त्याग का परिचय देना चाहिए।
ममता आशु ने आगे लिखा कि असली बदलाव तभी माना जाएगा, जब वर्तमान 543 सीटों में से ही 33 प्रतिशत महिलाओं को प्रतिनिधित्व दिया जाए, न कि नई सीटें जोड़कर इसे एक समझौते का रूप दे दिया जाए।
उन्होंने अपने बयान के अंत में कहा कि यह सिर्फ आरक्षण का मुद्दा नहीं है, बल्कि राजनीतिक ईमानदारी और नीयत की असली परीक्षा भी है।